बिलासपुर। हसदेव स्थित जंगल के लाखों को पेड़ को कटने से बचाने के लिए शहर के आजाद मंच के कार्यकर्ता भी सामने आए हैं। आजाद मंच के प्रमुख विक्रांत आजाद तिवारी ने कार्यकर्ताओं के साथ जंगल काटे जाने का विरोध कर रहे हैं। साथ ही आदिवासी समाज का समर्थन किया है। विक्रांत आजाद तिवारी ने बताया कि स्थानीय आदिवासी पिछले 10 सालों से जल जंगल जमीन और जनजाति को बचाने की लड़ाई रहे हैं। 2015 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय 17 कोल ब्लाक के लिए पूरे जंगल को काटने का फरमान जारी किया गया था।

विरोध में कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मौके पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया था। उन्होंने कहा भी था कि आदिवासियों की संस्कृति के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। सरकार बनते ही जंगल को बचाया जाएगा। लेकिन हुआ उल्टा। कांग्रेस सरकार ने उद्योगपतियों के समर्थन में आदिवासियों को उजाड़ने आदेश दिया है। हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन अब हसदेव क्रांति का रूप ले लिया है। कोयला पाने की जिद्द में हसदेव के जंगलों को काटा जा रहा है। इससे ना केवल आदिवासियों पर ही प्रभाव पड़ेगा। बल्कि सरगुजा से बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर तक लोगों का जीवन तबाह हो जाएगा।

इस विध्वंस से जल स्तर में भारी कमी आएगी। पर्यावरण बुरी तरह से प्रभावित होगा। बिजली बनाने वाले डैम के कैचमेंट एरिया तक खोदाई होने से बिजली उत्पादन में भी कमी आएगी। जंगल काटने से हजारों आदिवासी बेघर हो जाएंगे। और सैकड़ों वन्य जीवों की हत्या भी हो जाएगी। हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए एक अभिशाप साबित होगा। सरगुजा के आदिवासी राजनीति का शिकार हो गए हैं। सभी राजनीतिक दल उद्योगपतियों के हाथों आदिवासियों का सौदा कर चुके हैं। धन की वन और जनजीवन की लड़ाई है। इस लड़ाई में सभी सत्तासीन और विपक्षी उद्योगपतियों के तरफ दिखाई दे रहे हैं। आदिवासियों के साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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