बिलासपुर (नईदुनिया)। बैंकों में महीनों से बंद कुछ ग्राहकों के लाकर अब खुलने लगे हैं। 2000 के नोटों की आवाज आने लगी है, अर्थात लाकर में रखे नोटों को ग्राहक अब बाहर निकालने लगे हैं। आरबीआइ के एलान के बाद जो ग्राहक लाकर में अपना नोट छुपाकर रखे थे उन्हें बदलने पहुंच रहे हैं।

बाजार में भी गुलाबी नोटों की बहार आ गई है।न्यायधानी में भारतीय स्टेट बैंक सहित 17 बैंकों के लगभग 60 से अधिक शाखाएं हैं। इसमें निजी बैंक भी हैं। चुनिंदा शाखाओं में ही लाकर की सुविधा है। एक आंकड़ों के मुताबिक शहर में 4200 के लगभग लाकर हैं। सबसे ज्यादा एसबीआइ में हैं।

नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ बैंक अधिकारियों ने बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद कुछ ग्राहकों ने लाकर में आपरेशन नहीं किया। सालाना शुल्क जमा नहीं होने की स्थिति में उनसे संपर्क कर या नोटिस भी भेजा गया। इस बीच यह भी पता चला कि कुछ ग्राहकों का देहांत हो चुका है। नियमानुसार रिश्तेदारों से संपर्क कर प्रक्रिया पूरा किया गया, जबकि अभी भी कुछ लाकर नहीं खुले हैं।

उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करा दिया गया है। वहीं कुछ ग्राहक महीनों से अपना लाकर इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। अब आरबीआइ के 2000 नोट को लेकर किए गए एलान के बाद लाकर इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या में वृद्धि हुई है।

अभी प्रतिदिन कोई न कोई ग्राहक अपना लाकर खोल रहा है। अब उसमें वह क्या रखा है यह तो किसी को नहीं पता। लेकिन बैंक के जानकार ऐसा मान रहे हैं कि जिन्होंने गुलाबी नोट रखा होगा वे जरूर पहुंच रहे हैं।बाक्सक्या है बैंक लाकर के नियमबैंकों में अलग-अलग साइज के लाकर होते हैं। इसी साइज और लोकेशन के आधार पर सालाना चार्ज वसूल किया जाता हैं। सभी बैंको में अलग अलग शुल्क निर्धारित है। एसबीआई में तीन हजार से लेकर 10 हजार तक शुल्क लिया जाता है।

वहीं पीएनबी, केनरा बैंक, एचडीएफसी और आइसीआइसीआइ आदि में शुल्क अलग है। सभी को यह सुविधा मिले यह जरूरी नहीं कई बार ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। वेटिंग में रखा जाता है। जब कोई ग्राहक लाकर छोड़ता है तो उन्हें दिया जाता है। बाक्ससुरक्षा की गारंटी बैंक कीआरबीआइ के नए नियमों के अनुसार, बैंक की लापरवाही के चलते अगर लाकर में रखी सामग्री को कोई भी नुकसान होता है तो इसके लिए बैंक को भुगतान करना होगा। ये बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे परिसर की सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाएं जिसमें सुरक्षित जमा तिजोरी रखी गई है। अगर नुकसान बैंक के कर्मचारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के कारण होता है, तो बैंक की देयता लाकर के वार्षिक किराए के 100 गुना तक होगी।

बीमा के जरिए ले रहे नोट

न्यायधानी में 2000 के नोटों को बदलने बैंकों में जहां 20 हजार तक जमा लिया जा रहा है वहीं कुछ बीमा कंपनियां ग्राहकों को लालच दे रहे हैं। 2000 के नोटों के साथ बीमा करने पर टैक्स में छूट के साथ भविष्य में एकमुश्त बड़ी राशि मिलने दावा किया जा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर बकायदा विज्ञापन भी चल रहा है।

बैंकों में लाकर सुविधा को लेकर नियम तय है। आरबीआइ गाइडलाइन का पालन किया जाता है। एक साल तक ग्राहक यदि आपरेशन नहीं करते हैं तो उन्हें नोटिस भेजा जाता है। लाकर में ग्राहक ने क्या रखा है इसकी जानकारी किसी को नहीं होती। यह पूरी तरह से गोपनीय होता है। सुरक्षा देना हमारी जिम्मेदारी है।

राकेश कुमार क्षेत्रीय प्रबंधक, एसबीआइ बिलासपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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