बिलासपुर। शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। कोरोना महामारी के दो साल बाद बिलासपुर में नवरात्र को लेकर जबरदस्त तैयारी चल रही है। मूर्तिकार प्रतिमा को अंतिम रूप देने जुट गए हैं। इसमें कोलकाता की विशेष प्रकार की गंगा मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। गंगा मिट्टी सफेद रंग की होती है, जो प्रतिमाओं को आकर्षक बनाती है।

नवरात्रि के दौरान शक्ति कि देवी मां दुर्गा की पूजा-अराधना अलग-अलग रूपों में नौ दिनों तक चलती है। यह त्यौहार बिलासपुर में धूमधाम से मनाया जाता है। जिसे लेकर समितियां जोरदार तैयारी में जुट गई है। इस साल श्रद्धालू भक्तों में 16 फीट उंचाई तक प्रतिमाओं के दर्शन होंगे। बंगाली समुदाय के मूर्तिकार मां दुर्गा सहित मां सरस्वती, लक्ष्मी, भगवान गणेश और कार्तिकेय कि मुर्तियां बनाने में जुटे हुए हैं। देवरीखुर्द पावर हाउस स्थित तपन दादा का पूरा परिवार मूर्ति बनाने में जुट गया है। इस साल दुर्गा की 30 से अधिक प्रतिमाएं बना रहे हैं। जिसके लिए विशेष साड़ी व ज्वेलरी पश्चिम बंगाल सहित महाराष्ट्र व गुजरात से मंगाया गया है। उनका कहना है कि दो साल बाद समितियों में जबरदस्त उत्साह दिखा है। माता की प्रतिमा के लिए बेहद उत्साहित है। वहीं आदिशक्ति मां महामाया रतनपुर में प्रथम दिवस से पूजन प्रारंभ होगा।

बंगाली परंपरा में विशेष पूजन

बिलासपुर शहर में दुर्गा पूजा का अपना एक अलग ही महत्व हैै। जगमल चौक से प्रारंभ होकर आज 15 से अधिक स्थानों में बंगाली परंपरा के मुताबिक पूजा होती आ रही है। इस साल भी रेलवे परिक्षेत्र के बंगाली स्कूल, तोरवा, हेमूनगर, शंकर नगर सहित तारबाहर में पूजा होगी। जबकि भक्तों को एक से बढकर एक पंडाल और प्रतिमाओं के दर्शन होंगे। जिनमें सीएमडी कालेज, शिव टाकिज चौक, तेलीपारा, गोल बाजार, सदर बाजार, जूना बिलासपुर, कान्हेर गार्डन, राजेंद्र नगर चौक, सरकंडा आदि क्षेत्र शामिल है।

Posted By: Abrak Akrosh

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