बिलासपुर।Strike in Cims: सात साल से सिम्स प्रबंधन की दमनकारी नीति का शिकार हो रहे कर्मचारियों का आखिरकार गुस्सा फूट पड़ा। 300 से ज्यादा कर्मचारियों के हल्लाबोल से सोमवार को पूरा सिम्स प्रबंधन थर्रा गया। इस हड़ताल की वजह से पूरा इलाज प्रभावित हो गया और सैकड़ों लोग उपचार से वंचित हो गए।

सिम्स में तीसरे वर्ग के कर्मचारियों की सालों से सुध नहीं ली जा रही है। आलम यह है कि सात साल से इन कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी का लाभ नहीं दिया गया है, जबकि बड़े अधिकारियों का हर साल इंक्रीमेंट लगा है। इसके अलावा मूलभूत सुविधाएं से भी वंचित रखा गया।

मांग करने के बाद भी सिम्स प्रबंधन दमनकारी नीति अपनाते हुए कर्मियों के आवाज को दबाते आ रहा था, लेकिन अचानक ही 300 से ज्यादा कर्मचारियों ने आंदोलन का निर्णय लेते हुए सोमवार से कामबंद हड़ताल पर चले गए। इसका इतना ज्यादा असर पड़ा कि पूरी चिकित्सा सेवा थम सी गई। आलम यह रहा कि वार्डो में काम करने के लिए सफाई कर्मचारी तक नहीं मिले।

ओपीडी में डाक्टर तो रहे हैं, लेकिन ओपीडी संचालन के लिए कर्मचारी नहीं होने की वजह से लोग डाक्टर तक नहीं पहुंच पाए। इसी तरह एमआरआइ, सीटीस्कैन, सोनोग्राफी, एक्सरे जांच भी बंद रहा। वहीं पैथोलेब में किसी भी प्रकार के जांच के लिए सैंपल नहीं लिया गया।

ब्लड बैंक भी बंद रहा। एक तरह से हर प्रकार की सेवा बाधित रही। कर्मचारियों की एकजुटता और हड़ताल का असर देखकर सिम्स प्रबंधन भी डर गया। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश की गई, लेकिन इससे बात नहीं बनी और लोग उपचार से वंचित होते रहे हैं।

Posted By: anil.kurrey

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