बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने रेल मंत्रालय द्वारा 34 यात्री गाड़ियों को न चलाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। समिति बुधवार को रेल मंत्री का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराएगी। समिति ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि जिस कोयला परिवहन से रेलवे को सर्वाधिक आय होती है उसी कोयले के लिये छत्तीसगढ़ जैसे कोयला उत्पादक राज्य को यह दिन देखना पड़ रहा है।

देश में कोयले का सर्वाधिक उत्पादन 158 मिलीयन टन बीते वर्ष छत्तीसगढ़ में रहा है। भंडारण के हिसाब से देखा जाये तो झारखंड और आडिशा में कोयला भंडार छत्तीसगढ़ से अधिक है। अर्थात छत्तीसगढ़ वर्तमान में ही अपनी क्षमता से अधिक कोयला उत्पादन कर रहा है। इसका सीधा दुष्परिणाम यह हुआ है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से गुजरने और प्रारंभ होने वाली 34 यात्री गाड़ियों को बीते एक महीने से बंद रखा गया है। यह शादी ब्याह और छुट्टियों का सीजन है।

इन्ही यात्री गाड़ियों को एक महीना बंद रखने का फैसला छत्तीसगढ़ की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को छिन्न्- भिन्न् कर देगा। यही नहीं पिछले छह महीने से जो यात्री गाड़ियां चल रही है उनका ठहराव बिल्हा, करगी रोड, खोडरी, खोंगसरा, बेलगहना जैसे स्टेशनों पर समाप्त कर दिए गए हैं। यह भी केवल कोयला परिवहन के लिये किया जा रहा है। छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने जानकारी देते हुये बताया कि देश में इस समय 91 हजार मेगावाट क्षमता के सौर और पवन ऊर्जा के पावर प्लांट तथा 24 हजार मेगावाट के गैस आधारित पावर प्लांट लगे हुये हैं जिनका उपयोग बहुत कम किया जा रहा है।

देश की वर्तमान अधिकतम बिजली की मांग दो लाख 10 हजार मेगावाट है जिसमें से आधा हिस्सा बिना कोयले के बनाया जा सकता है परंतु केंद्र और राज्य सरकार अधिकतम बिजली कोयले से ही बना रही है। जबकि वह कई मामलों में महंगी भी पड़ रही है। कोयले पर आधारित बिजली पर हमारी निर्भरता यातायात के यह सबसे सुलभ साधन रेलगाड़ी को आम जनता से दूर कर रही है।

उपरोक्त परिस्थिति में केन्द्र सरकार को नींद से जगाने के लिये छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति बुधवार को दोपहर 12 बजे तारबाहर चौक पर केंद्रीय रेल मंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन करेगी। समिति ने सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों से समय पर पहुंचने की अपील की है।

Posted By: anil.kurrey

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