बिलासपुर। प्रदेश को टीबी मुक्त करने को स्वास्थ्य विभाग द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में क्षय रोग को मात दे चुके मरीज, अब टीबी मितान बनकर जनमानस को जागरूक करने में सहयोग कर रहे हैं। टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है, बशर्ते इसका समय से उपचार शुरू कर दिया जाए, इसका संदेश देते हुए टीबी मितान इलाज से कतरा रहे टीबी रोगियों का उपचार भी करा रहे हैं। साथ ही साथ शासन की ओर से मिलने वाली पोषण राशि दिलाने में सहयोग भी कर रहे हैं।

कोटा निवासी 22 वर्षीय विकास साहू बताते हैं कि टीबी मितान का कार्य मेरे लिए आसान नहीं था। इस काम में कई बार अपमान, लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा मगर दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत मैं लोगों को जागरूक करने में सफल हुआ हूं। लोग अब मेरी बात भी मानते हैं और खुद ही अपनी समस्या भी बताते हैं।

छोटे भाई-बहन को ना हो बीमारी, इसका सता रहा था भय

विकास के मुताबिक चार साल पहले 2017 में उन्हें पता चला कि उन्हें टीबी हो गई है। वह घबरा रहे थे लेकिन क्षय रोग अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों और उनकी टीम ने उनका इलाज शुरू किया। नौ माह के नियमित इलाज के बाद उन्होंने टीबी को हरा दिया। इस दौरान उन्हें क्षय पोषण योजना के तहत रुपये प्रतिमाह मिले। विकास कहते हैं कि मुझे बीमारी से ज्यादा डर इस बात का लग रहा था कि कहीं मेरे भाई-बहन को भी टीबी ना हो जाए। इसलिए मैंने अपना खाना-पीना, उपयोग का सारा सामान अलग रखा था।

अनुभव बताना बड़ी चुनौती

विकास कहते हैं कि वर्ष 2021 से मैं प्रशिक्षण लेकर टीबी मितान के रूप में कार्य कर रहा हूं। लोगों को अपने अनुभव के बारे में बताना बड़ी चुनौती थी क्योंकि लोग उनकी बात सुनना नहीं चाहते थे। कुछ लोग तो अपनी बीमारी के बारे में बताते भी नहीं थे। किसी तरह परिवार वालों , मरीज के परिजनों, उनके आसपास के लोगों को समझाकर जानकारी लेते थे तथा उनका टीबी का इलाज शुरू करवाते थे। कई बार तो विभागीय अधिकारियों, टीबी समन्वयक के हस्तक्षेप करने पर टीबी मरीजों का इलाज शुरू होता था। मगर अब लोग जागरूक हो रहे हैं, लोग अब खुद ही फोन या संपर्क कर टीबी मरीजों की जानकारी देते हैं।

टीबी का इलाज और पोषण भत्ता

सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में इसकी नि:शुल्क जांच, इलाज और दवाई उपलब्ध है। टीबी के पंजीकृत मरीजों को क्षय पोषण योजना के तहत इलाज के दौरान पोषण आहार के लिए प्रति माह 500 रुपये की राशि दी जाती है। डाट सेंटर्स या डाट प्रोवाइडर्स के माध्यम से टीबी से पीड़ित मरीजों को घर के पास या घर पर ही दवाई उपलब्ध कराई जा रही है।

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