बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। कार्य का अनुभव न होने और छत्तीसगढ़ की मूल निवासी न होने के बाद भी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए नियुक्ति पाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने चिकित्सा महाविद्यालय में सहायक प्राध्यपक की नियुक्ति को हाई कोर्ट के निर्णय से बाधित रखा है। याचिकाकर्ता ने राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा की गई नियुक्ति प्रक्रिया को रद करने की मांग भी की है।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने फरवरी 2022 में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। जिस पर दुर्ग की डा. विनंती मोतीराम कानगले व बिलासपुर जिले की डा. प्रभा सोनवानी ने भी आवेदन किया था। विज्ञापन की कंडिका तीन के अनुसार किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल कालेज में संबंधित में विषय में जूनियर रेजिडेंट के रूप में तीन व और किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल कालेज से संबंधित विषय में वरिष्ठ रेजिडेंट के रूप में एक वर्ष और अनुसूची एक के खंड चार के अनुसार एमडी या एमएस के समतुल्य मास्टर डिग्री का होना आवश्यक है।

इसके अलावा तीन वर्ष के अध्यापन का अनुभव को अनिवार्य किया गया है। या फिर किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालय में सीनियर रेजिडेंट के रूप में एक वर्ष के अनुभव को मान्य किया गया है। डा. प्रभा सोनवानी ने सहायक प्राध्यापक, नेत्र रोग के पद पर योग्यताधारी होने के कारण उपरोक्त पद के लिए आवेदन प्रस्तुत किया थ। जिस पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा अंतिम चयन सूची जारी किया गया। इसमें डा विनंती मोतीराम कानगल का चयन किया गया।

डा. प्रभा सोनवानी का नाम अनुपूरक सूची में रखा गया। राज्य लोक सेवा आयोग के इस निर्णय के खिलाफ डा. प्रभा सोनवानी ने वकील मतीन सिद्दीकी और नरेन्द्र मेहेर के जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका के अनुसार डा. विनंती मोतीराम कानगले न्यूनतम शौक्षणिक योग्यता एमबीबीएस है। अध्यापन अनुभव या डीएनवी प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त कार्य अनुभव के अलावा किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल कालेज में संबंधित विषय में वरिष्ठ रेजिडेंट के रूप में एक वर्ष निर्धारित अनुभव हासिल किया है।

याचिकाकर्ता ने महात्मा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर के द्वारा तैयार की गई सूची की जानकारी देते हुए कहा है कि डा. कानगले ने प्रारंभिक चिकित्सा सेवा पूरी नहीं की है और न ही बांड अमाउंट भी जमा किया है। इसके कारण विभाग ने इनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की अनुशंसा भी की थी।

एक अहम मुद्दा यह भी उठाया

याचिकाकर्ता ने जानकारी दी है कि डा. विनंती मोतीराम कानगले महाराष्ट्र की मूल निवासी है। वर्ष 2016 में शादी के बाद छत्तीसगढ़ राज्य का निवास प्रमाण पत्र द्वारा आयु सीमा में छूट का लाभ ले रही है। इसका कोई प्रविधान नहीं है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी की सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद जस्टिस कोसी ने डा कानगले की नियुक्ति को हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय से बाधित रखा है।

Posted By: anil.kurrey

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