बिलासपुर। शास्त्रों में भी गुरु के स्थान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। हमें जिससे भी सीखने को मिले, वह हमारा गुरु बन जाता है। सर्वप्रथम मां हमारी गुरु होती है, प्रकृति भी हमारी गुरु है, जो हमें जीवन निर्वाह अर्थ कितना कुछ देती है। परम शक्ति ,परमपिता परमात्मा, जो गुरुओं के भी गुरु भगवान शिव है। गुरु के अंदर गुरुर नहीं होता और वह हमारे अंदर के गुरुर को भी समाप्त करते हैं और हमें अज्ञान अंधियारे से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

ये बातें ब्रह्मा कुमारी गायत्री ने शिव अनुराग भवन में ब्रह्माकुमारीज के तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में कही।

आगे उन्होंने गुरु का हमारे जीवन में कितना महत्व होता है उसके बारे में भी बताया और कहा कि गुरु ही पूर्ण मां है। जीवन में आध्यात्मिक उन्नाति का आधार श्रेष्ठ गुरु का सानिध्य है। लगातार ज्ञान की उपासना करते रहना ही गुरु की भक्ति है। अतीत भी हमारा गुरु ही होता है। अतीत से सीख लेकर काम करेंगे तो, हम कई बाधाओं से बच सकते हैं। किसी व्यक्ति को सही गुरु मिल जाए, तो ग्रंथ पढ़े बिना ही वह ज्ञानी बन जाता है। गुरु के ज्ञान और अनुशासन के बल पर एक अज्ञानी व्यक्ति भी ज्ञानी बन सकता है।

गुरु के उपदेशों को सुनना ही नहीं जीवन में उतारना भी चाहिए। भगवान से भी बढ़कर गुरु का स्थान होता है, इसलिए गुरु का हर स्थिति में सम्मान करना चाहिए। गुरु सही, गलत का हमें बोध कराते हैं, अशांति और असफलता दूर करने का रास्ता बताते हैं। गुरु की सीख मानेंगे और जीवन में अनुशासन बनाए रखेंगे व नकारात्मक विचार से दूर होंगे तो जीवन में शांति बनी रहेगी। गुरु बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान बिना आत्मा नहीं, ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म सब कुछ गुरु की ही देन है।आषाढ़ मास के आखरी दिन को सभी स्थानों पर गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। अंत में सभी को प्रसाद वितरण किया गया।

Posted By: Abrak Akrosh

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