बिलासपुर। मधु शर्मा। विनोबा नगर में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट दंपती ने जिस हिम्मत से जिंदगी की जंग लड़ी है वो उन लोगों के लिए एक सबक बन सकती है जो छोटी-मोटी समस्याओं से ही टूट जाते हैं। आशीष मजूमदार (43) व उनकी पत्नी श्वेता (40) ने कैंसर जैसी घातक बीमारी को मात दी है वो भी एक नहीं तीन-तीन बार। अब वे चैरिटी के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की इस बीमारी से लड़ने में मदद कर रहे हैं ।

आशीष को 1983 में 10 साल की उम्र में पहली बार पैर की हड्डी में कैंसर हुआ जिसके चलते उनका पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। आशीष की शादी श्वेता से हुई। दो बच्चे हुए लेकिन 1999 में कैंसर ने फिर आ घेरा। इस बार उनकी पत्नी श्वेता को थायमस ग्लैंड में कैंसर का पता चला।

श्वेता का ऑपरेशन टाटा मेमोरियल में हुआ। कैंसर तो ठीक हो गया, लेकिन उन्हें मांसपेशियों को कमजोर करने वाली बीमारी माइस्थीनिया ग्रेविस हो गई। इससे श्वेता की जुबान भी लड़खड़ाने लगी और हाथ और पैरों में कमजोरी आ गई। इस बीच आशीष को कोलोन कैंसर होने का पता चला। लेकिन अब आशीष और उनकी पत्नी दोनों कैंसर को मात देकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। ये दंपती मेडिकल साइंस के लिए भी यह अनोखी मिसाल बन गए हैं। दोनों चैरिटी के माध्यम से भी सेवा कार्य में लगे रहते हैं। साथ ही कैंसर के प्रति फैली भ्रांतियों को भी दूर करते हैं।

Posted By: