बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। बिलासपुर रेलवे यार्ड में इतवारी-टाटा एक्सप्रेस के यात्री रविवार की सुबह बाल-बाल बच गए। यात्रियों को झटका लगा और ट्रेन खड़ी हो गई। इसके बाद जो नजारा सामने आया उसे देखकर चालक, गार्ड के अलावा रेल अफसरों के होश उड़ गए। एक साथ छह कोच के बफर एक-दूसरे से चिपकने के बजाय अलग होकर फंस चुके थे। इसी स्थिति में यदि ट्रेन कुछ दूर भी जाती तो बेपटरी हो जाती। बाद में जिन छह कोच में दिक्कत आई थी, उसे ट्रेन से अलग किया और इनमें सवार यात्रियों को दूसरे कोच में शिफ्ट किया गया।

घटना सुबह 11:30 बजे की है। इतवारी-टाटा एक्सप्रेस इसी समय पर बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली थी। स्टेशन में उद्घोषणा के साथ डिस्प्ले भी होने लगा था। कुछ देर बाद ट्रेन का समय बताना बंद हो गया। दरअसल एक साथ छह कोच का बफर एक-दूसरे से अलग होने की घटना इससे पहले नहीं हुई। यह अफसरों ने भी पुष्टि की। मौके पर पहुंचे अफसरों ने जांच की तो देखा की बफर फंस गया था। इस स्थिति में यदि ट्रेन थोड़ी आगे भी जाती तो सभी छह कोच पटरी से उतर सकते थे।

जिस समय यह घटना हुई, उस समय यात्रियों को झटका भी लगा। हालांकि किसी को चोट लगी या नहीं, इसकी पुष्टि तो नहीं हो सकी। पर रेलवे का कहना है कि सभी यात्री सुरक्षित थे। केवल तीन कोच में ही यात्री सफर कर रहे थे। बाकी के तीन एक एसएलआर और दो पार्सलयान बोगी थी। यात्रियों को नीचे उतारा गया और दूसरे कोच में बैठाया गया। इसके बाद छह कोच को अलग कर बचे 10 कोच में इंजन जोड़कर प्लेटफार्म में लाया गया। एक साथ तीन कोच कम होने से यात्रियों को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।

क्या है बफर

किसी भी ट्रेन के सुरक्षित परिचालन के लिए बफर महत्वपूर्ण होता है। दो कोच के बीच में गोल आकार का लोहा रहता है, उसे ही बफर कहा जाता है। यह एक तरफ से शाकब है। दो बफर के बीच में कपलिंग रहती है। बफर की वजह से यात्रियों को परिचालन के दौरान झटका नहीं लगता। यदि यह थोड़ा भी ऊपर नीचे है, तो यह असुरक्षित होने का संकेत है।

देर रात तक चलता रहा परीक्षण

छह कोच अलग करने पर रेलवे का संबंधित विभाग के अधिकारी व कर्मचारी परीक्षण करने के लिए पहुंचे। देर रात तक वे परीक्षण कर यह जानने का प्रयास करते रहे कि आखिर बफर अलग होकर एक-दूसरे से कैसे फंसे। परीक्षण के बाद रिपोर्ट रेल प्रशासन प्रशासन को सौंपी जाएगी।

ये हो सकती है वजह

आपातकालीन ब्रेक: रेल प्रशासन द्वारा मामले की जांच कराई जा रही है। प्रथम दृष्टया यह बात सामने आ रही है कि ट्रेन की गति काफी तेज थी। यार्ड में इतनी रफ्तार से नहीं चलती। चालक को जब गति तेज लगी होगी, तब उन्होंने आपातकालीन ब्रेक लगाई। अचानक ब्रेक लगने के कारण एक के बाद एक छह कोच के बफर एक-दूसरे से फंस गए।

पार्सलयान में अधिक वजन: इस ट्रेन में एसएलआर (पार्सल बोगी) के अलावा दो पार्सलयान (वीपी) भी थे। इसमें क्षमता से अधिक पार्सल रहता है। माना जा रहा है कि वजन अधिक हो गया होगा। इससे बफर एक-दूसरे से अलग-अलग हो गए।

ट्रैक में गड़बड़ी- यह बात भी सामने आ रही है कि यह घटना ट्रैक की गड़बड़ी की वजह से भी हो सकती है। हो सकता है, जहां पर यह घटना हुई है वहां ट्रैक नीचे दबा हो या अन्य तकनीकी खराबी रही होगी। हालांकि पूरी स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी।

Posted By: anil.kurrey

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