बिलासपुर। Bilaspur News: विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान अगर उम्मीदवार पसंद के नहीं हैं तो नोटा के जरिए मतदान कर अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को अधिकार संपन्न बनाने लगातार नियमों में बदलाव कर रहा है। नोटा का अधिकार मिलने के बाद मतदाताओं के तेवर भी सख्त नजर आते हैं। उम्मीदवारों की पसंद और नापसंद के लिए चुनाव आयोग ने नोटा का प्रभावी हथियार मतदाताओं के हाथों में दे दिया है।

भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में नोटा की शुस्र्आत की। तब छत्तीसगढ़ के अलावा मिजोरम, राजस्थान, मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में चुनाव होना था। आयोग के निर्देश पर ईवीएम में उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिन्ह के अलावा सबसे आखिर में इनमें से कोई नहीं नोटा का बटन लगाया। चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान जब यह प्रयोग सफल रहा तब आयोग ने वर्ष 2014 से नोटा को पूरे देश में लागू करने का आदेश जारी किया।

विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान के तरीके को लेकर आयोग लगातार बदलाव करते रहा है। एक वह भी दौर था जब मतपत्रों के जरिए मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। मतपत्रों के जरिए वोट मतपेटी में डाला जाता था। वोटों की गिनती के दौरान लंबी प्रक्रिया से गुजरनी पड़ती थी। आयोग ने इसमें सुधार किया और मतपत्र के बजाय ईवीएम के जरिए मतदान को चालू किया। ईवीएम के जरिए मतदान का एक फायदा हुआ कि वोट रिजेक्ट होना बंद हो गया। मतपत्रों के जरिए वोटिंग के दौरान वोट निरस्त होने की संख्या काफी बढ़ जाती थी।

गिनती के दौरान जब दो उम्मीदवारों के बीच नजदीकी मामला होता था तब एक-एक वोट को लेकर विवाद की स्थिति भी बनती थी। इससे छुटकारा मिल गया। ईवीएम के साथ ही नोटा का अधिकार भी मतदाताआंे को मिला। इसका असर भी दिखाई देने लगा है। मतदाताओं को चुनाव मैदान में खड़े उम्मीदवर नापसंद हैं तो बेझिझक नोटा का बटन दबा देते हैं। गिनती के दौरान नोटों को मिले वोटों की संख्या देखकर इस बात का अंदाजा भी सहज हो जाता है कि आयोग द्वारा मिले अधिकार का मतदाता बखूबी इस्तेमाल करने लगे हैं।

वर्ष 2018 में नोटा को मिला उम्मीदवारों के समकक्ष दर्जा

नोटा का असर अब प्रभावी होने लगा है। वर्ष 2018 में नोटा को पहली बार देश में उम्मीदवारों के समकक्ष दर्जा मिला। कारण भी साफ था। जितने उम्मीदवार चुनाव मैदान में खड़े हुए थे नोटा को उन सबसे ज्यादा वोट मिले थे। बिना प्रचार प्रसार के नोटा ने उम्मीदवारों को एक झटके में पटखनी दे दी थी। हरियाणा में दिसंबर 2018 में पांच जिलों में नगर निगम का चुनाव संपन्‍न हुआ। वोटों की गिनती के दौरान सभी उम्मीदवारों से नोटा को अधिक वोट मिले थे। लिहाजा स्थानीय निर्वाचन आयोग ने सभी उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करते हुए दोबारा चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।

छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य

स्थानीय निकाय के चुनाव में मतदाताओं को नोटा का विकल्प देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकाय के चुनाव में मतदाताओं को नोटा का उपयोग करने का विकल्प दिया गया है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

मरवाही उपचुनाव में निर्दलीयों से नोटा को ज्यादा वोट

मरवाही विधानसभा उपचुनाव के दौरान नोटा का असर भी देखने को मिला। निर्दलीय उम्मीदवारों से नोटा से ज्यादा वोट हासिल किया था। साढ़े पांच हजार से अधिक वोट नोटा ने हासिल किया था।

Posted By: sandeep.yadav

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