बिलासपुर। भिलाई शहर के गरीबों का रियायती दर पर इलाज करने हास्पिटल बनाने के नाम पर करोड़ों की जमीन कौड़ी के भाव लेकर बाद में व्यावसायिक काम्प्लेक्स बना दिया। इस मामले में पेश जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इस पर नारागजी जताई और शासन, भिलाई नगर निगम और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर 18 जनवरी तक जवाब मांगा है।

भिलाई शहर की एक महिला ज्योति की जनहित याचिका पर गुरुवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। अधिवक्ता अनिमेष वर्मा ने बताया कि भिलाई विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) कार्यकाल में 1995 में हरदीप सिंह राजपाल को नेहरू नगर चौक पर जीई रोड के बिलकुल किनारे प्रियर्दशनी परिसर पश्चिम में 33099 वर्ग फीट जमीन आवंटित हुई थी।

साडा ने उन्हें करोड़ों की यह जमीन अस्पताल निर्माण के लिए दी थी जिसकी शर्त में साफ लिखा था कि इस अस्पताल में नो प्राफिट नो लॉस के आधार पर साडा (अब नगर निगम) कर्मचारियों और शहर के लोगों का रियायती दर पर इलाज होगा।

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि बाद में आवंटिती ने हास्पिटल की जगह यहां बड़ा व्यावसायिक काप्लेक्स तान दिया। इतना ही नहीं नगर निगम को बिना बताए व एनओसी के एक हिस्सा बी ब्लाक संजय अग्रवाल को भी बेच दिया। अग्रवाल ने भी निगम से बिना अनुमति के भूतल एवं तीन मंजिला व्यावसायिक काम्प्लेक्स बना लिया।

अब हास्पिटल की जगह यहां बड़े-बड़े सरकारी, अद्र्वसरकारी और निजी कारोबारी प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। इससे आवंटिती हर महीने लाखों रुपए किराया कमा रहा है.प्रकरण पर सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस की डीविजन बेंच ने राज्य शासन, भिलाई नगर निगम और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर 18 जनवरी तक जवाब मांगा है।

Posted By: anil.kurrey

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