बिलासपुर। बिल्हा व मस्तूरी विकासखंड के 208 गांव के किसानों के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है। अल्प और खंडवृष्टि से प्रभावित धान की फसल को जीवनदान देने के लिए खूंटाघाट और घोंघा जलाशय से सात अगस्त को पानी छोड़ा जाएगा। दोनों जलाशयों मंे वर्तमान में जल भराव की स्थिति अच्छी है। खूंटाघाट में 88 और घोंघा जलायाय में 59 फीसद जल भराव है।

अल्प और खंडवृष्टि के कारण बिलासपुर जिले के बिल्हा व मस्तूरी ब्लाक में सूखे की स्थिति बनने लगी है। दोनों ब्लाक के 208 गांव में धान की फसल की स्थिति बेहद खराब है। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला तो धान के पौधे सूखने लगेंगे। इसे देखते हुए कलेक्टर सौरभ कुमार ने जल संसाधन विभाग के अफसरों को जलाशयों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने के निर्देश दिए हंै।

सात अगस्त को खूंटाघाट और घोंघा जलाशय से पानी छोड़ने का निर्णय जल संसाधन विभाग ने लिया है। जलाशयों के गेट खोलकर नहरोें के लिए सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा। सात अगस्त को सुबह आठ बजे से दोनों जलाशयों के गेट खोले जाएंगे। जलाशयों के गेट खोलने के बाद नहरों के जरिए पानी आपूर्ति की जाएगी। जल संसाधन विभाग खारंग द्वारा खूंटाघाट जलाशय के बांयी एवं दायी दोनों तट नहरों तथा घोंघा जलाशय की नहरों से पानी छोड़ा जाएगा।

मुख्य नहर की वितरक शाखा एवं उप शाखा नहरों में उनकी क्षमता के अनुरूप सिंचाई के लिए पानी दिया जाना है । उन्होंने बताया कि मुख्य नहर के अंतिम छोर तक सिंचाई के लिए किसानों को पानी मिले इसके लिए मैदानी अमलों को दिन-रात पैट्रोलिंग के निर्देश दिये गये हैं। क्षेत्र के किसानों से सहयोग की अपील की गई है कि वे पानी एवं नहर को सुरक्षित रखते हुये जरूरत के मुताबिक ही पानी का उपयोग करें।

मछली मारने वालों एवं अन्य असामाजिक किस्म के लोगों द्वारा रात में नहर के पानी को हैंडअप कर रोकने की प्रवृत्ति को देखते हुए रात में भी पैट्रोलिंग की जाएगी। नहर पाटने या पंप अथवा अन्य माध्यम से अवैधानिक रूप से सिंचाई करने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

विभागीय अधिकारी ने किसानों से की अपील

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से किसानों से अपील की है कि सिंचाई सुविधा के लिए दो जलाशयों से नहरों में छोड़े जा रहे पानी का उपयोग धान की फसल को बचाने के लिए करें। जितनी जरूरत हो उतना ही पानी लें। शेष दूसरे गांव के जरूरतमंद किसानों के लिए जाने दें। नहरों में पानी का बहाव होते रहना चाहिए। यह जिम्मेदारी किसानों की है। दूसरे गांव के किसान को भी धान की फसल को बचाने के लिए पर्याप्त पानी मिले यह देखने का काम भी किसानों का ही है।

आज से कोटवार गांव में करेंगे मुनादी

बिल्हा व मस्तूरी ब्लाक के 208 गांव में कोटवार शनिवार से सुबह और शाम मुनादी कर किसानों को जानकारी देंगे। इस दौरान जरूरत के मुताबिक नहर से खेतों में पानी की सिंचाई करने किसानांे से अपील भी करेंगे।

कमिश्नर व कलेक्टर ने किया था दौरा

बिल्हा व मस्तूरी ब्लाक के सूखा प्रभावित गांवों का बीते दिनों कमिश्नर डा. संजय अलंग व कलेक्टर सौरभ कुमार ने दौरा किया था। इस दौरान प्रभावित किसानों से सीधी बात की थी। चर्चा के दौरान किसानों ने सूखे की स्थिति की जानकारी देने के साथ ही सिंचाई के लिए जलाशय से पानी छोड़ने की मांग की थी।

जल उपयोगिता समिति की बैठक में उठा था मुद्दा

शुक्रवार को कमिश्नर डा. एसके अलंग ने संभाग के कलेक्टरों व विधायकों की वर्चुअल मीटिंग ली थी। इसमें सूखे की स्थिति को लेकर विधायकों ने चिंता जाहिर की थी व जलाशयों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की बात भी कही थी।

पांच बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में जल भराव

बांगो परियोजना में 54 प्रतिशत, केलो परियोजना में 26 प्रतिशत, खारंग जलाशय में 88 प्रतिशत, मनियारी जलाशय में 90 प्रतिशत एवं अरपा भैंसाझार में 33 प्रतिशत जलभराव है।

मध्यम परियोजना

घोंघा जलाशय में 59 प्रतिशत, केडार जलाशय में 55 प्रतिशत, पुटका जलाशय में 48 प्रतिशत, किंकारी जलाशय में 62 प्रतिशत और खम्हार पाकुट जलाशय में 65 प्रतिशत जल भराव है।

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