बिलासपुर। Bilaspur News: पुराणिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में सनातन धर्म के मानने वाले श्राद्ध करते हैं। श्राद्धकर्म का विशेष महत्व है। श्रद्धा से जुड़े होने के कारण पितृ श्राद्ध पक्ष यानी महालय में पूर्वजों के नाम पर तर्पण किया जाता है। आस्थावान लोग घरों, तालाब, नदी में जल तर्पण करते हैं। इसमें अपने पितरों के साथ मातृ कुल के पूर्वर्जों को तर्पण कर उनके नाम से यथासंभव दान पुुण्य करते हैंं। इस काल में दान पुण्य का विशेष महत्व है।

नगर में श्रद्धालु पितृ तर्पण के बाद गौ, कौआ के लिए भोग प्रसाद अलग से निकालते हैं। मान्यता है कि जीवात्मा के ग्रहण कर लेने पर पूर्वज प्रसन्न् होते हैंं। इस संबंध में नगर में स्थित राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित नागरमल शर्मा ने बताया कि समाज में परिवार के दायित्वों से जुड़ा हुआ है। पितरांे के तर्पण से पुण्य लाभ होता है।

इसलिए मान्यताओं के कारण अपने पूवर्जों के प्रति आस्थ्ाा जताते हुए तर्पण और होम धूप दिया जाता है। घर केे मुख्य द्वार के सामने आटा की रंगोली बनाकर फूल चढ़ाकर पितरों के आने का स्वागत किया जाता है। इस काल में स्वजनों के प्रति यथासंभव आक्रोश नहीं व्यक्त करना चाहिए। श्रद्धालु जन श्राद्ध पक्ष के अवसर पर दान पुण्य, भोजन कराकर अपने पितरों को प्रसन्न् करते हैं।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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