बिलासपुर। Bilaspur News: जिले के सात नए धान उपार्जन केंद्रों में बिना चबूतरा और शेड निर्माण के ही खुले आसमान के नीचे धान खरीदी होगी। धान खरीदी के लिए नए केंद्रों की स्वीकृति देने में की गई देरी का खामियाजा अब सामने आ रहा है। गांव में उपार्जन केंद्रों के लिए स्थल चिन्हांकित तो कर दिया गया है, लेकिन चबूतरा और शेड के अलावा पेयजल, बैठक व्यवस्था, विद्युतीकरण, बाउंड्रीवाल, डाटाएंट्री कक्ष आदि की सुविधा नहीं है। ऐसे में धान बेचने के लिए पहुंचने वाले किसानों को न केवल असुविधा होगी बल्कि खरीदी के दौरान बरसाती मार से धान भी भीगेंगे।

राज्य सरकार ने एक दिसंबर से धान खरीदी करने का निर्णय लिया है। अब तक 42 उपार्जन केंद्रों में ही धान की खरीदी हो रही थी। इस वर्ष सात नये केंद्र बनाए जाने से संख्या 49 हो गई हैं। जिनमें करतला विकासखण्ड में करइनारा, नोनबिर्रा और लबेद, कटघोरा विकासखण्ड में सुमेधा, पोड़ी-उपरोड़ा विकासखण्ड में कुलहरिया, पाली में नीरधी तथा कोरबा में दादर खुर्द शामिल है।

नवीन केंद्रों में शेड के अलावा ड्रेनेज के लिए चबूतरें की भी सुविधा नहीं हैं। किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय करनी न पड़े इसलिए नए उपार्जन केंद्रों की वर्षों से मांग की जा रही थी। समय रहते नए केन्द्रों कि स्वीकृति दे दी जाती तो संभवत: यहां समुचित व्यवस्था किया का सकता था । अचानक स्वीकृति का निर्णय लिए जाने से वैकल्पिक सुविधाओं के भरोसे ही धान खरीदी करनी पड़ेगी।

धान खरीदी और डंपिंग करने के लिए गांव से बाहर धान संग्रहण स्थल चिन्हांकित किए गए हैं। ग्राम दादर खुर्द में तो समतलीकरण भी नहीं किया गया है। ग्राम विकास समिति के सचिव कृष्णा द्विवेदी ने बताया गांव के लोगों को पहले 20 किमी दूर सोनपुरी जाना पड़ता था। केंद्र शुरू होने से गांव के किसानों में प्रसन्ना्ता है, लेकिन समय रहते स्वीकृति दे दी जाती तो व्यवस्थित जगह में चबूतरा और शेड भी बन सकता था।

खरीदी के लिए गिनती के ही दिन शेष रह गए हैं। मौसमी उतार-चढ़ाव अभी से शुरू हो गया है। बारिश के दौरान यहां धान भीगने की संभावना है। चबूतरा शेड की कमी केवल नए केंद्र ही में नहीं बल्कि पुराने में भी है। शहर से लगे कनबेरी उपार्जन केंद्र में अभी तक शेड की सुविधा नहीं है।

27 से दिया जाएगा टोकन

एक दिसंबर से धान खरीदी शुरू हो रही है। एक दिन में निश्चित किसानों के ही धान खरीदी किए जाने के लिए बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी टोकन नियम जारी रहेगी। 27 नवंबर से किसानों को टोकन दिया जाएगा,जिससे उपार्जन केंद्र में भीड लगेगी। बैठक, पेयजल जैसे समुचित सुविधाओं की केद्रों में कमी देखी जा रही है।

नहीं हुआ है पर्याप्त बारदानों का संग्रहण

कोरो ना काल में नए बारदानों की बुनाई नहीं होने से अब खरीदी की सारी दारोमदार पुराने पर ही निर्भर है। 49 उपार्जन केद्रों के लिए 20 लाख बार दानों की आवश्यकता है। अभी तक केवल 12 लाख ही बार दाने उपलब्ध हैं। खरीदी की निकटता को देखते हुए अभी तक केन्द्रों में बार दानों का संग्रहण हो जाना था, पी डी एस दुकानों के संग्रहण में असहयोग और निजी वाहन चालकों से परिवहन कराए जाने से आपूर्ति बाधित है।

फैक्ट फाइल

  • धान खरीदी की शुरुआत: एक दिसंबर
  • कुल समितियों की संख्या: 41
  • कुल उपार्जन केंद्र की संख्या: 49
  • धान खरीदी का लक्ष्य: 12.50 लाख क्विंटल
  • पंजीकृत किसान: 32589

Posted By: sandeep.yadav

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