बिलासपुर। कोरबा- अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस की पेंट्रीकार का चूल्हा 21 माह बाद मंगलवार को जलने लगा है। इस ट्रेन के यात्रियों को अब मनचाहा भोजन या नाश्ता लेने के लिए प्लेटफार्म पर नहीं उतरना पड़ेगा। ट्रेन के बिलासपुर रेलवे स्टेशन से रवाना होने से पहले आइआरसीटीसी की टीम पेंट्रीकार का निरीक्षण किया। इस दौरान सफाई के अलावा यूनिफार्म, मास्क व दस्ताने पहनने के लिए कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई। उन्हें चेतावनी भी दी गई यदि किसी तरह की शिकायत आती है तो सीधे जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।

कोरोना संक्रमण के कारण रेलवे बोर्ड से लगी पाबंदी की वजह से इस ट्रेन की पेंट्रीकार में खाना नहीं पक रहा था। केवल पैकेट बंद सामान ही बिक रहे थे। इस स्थिति में यात्री मनपसंद भोजन से वंचित हो जा रहे थे। इसके लिए उन्हें अवैध वेंडर या फिर स्टेशनों में उतरना पड़ रहा था। जबकि यात्री चाह रहे थे कि उनकी बर्थ पर ही भोजन व नाश्ता पहुंच जाएं। पर प्रतिबंध की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा था।

पिछले दिनों रेलवे बोर्ड ने पेंट्रीकार में भी खाना पकाने की अनुमति दी। इसकी सूचना आइआरसीटीसी को देकर व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि यह सुविधा रविवार से शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन कोरोनाकाल में इस ट्रेन का परिचालन सप्ताह में तीन दिन कर दिया गया है। इस लिहाज से सुविधा मंगलवार से शुरू हुई। पर संबंधित लाइसेंसी ने तैयारियां पहले ही प्रारंभ कर दी थी।

चूंकि इस सुविधा का मंगलवार को पहला दिन था। इसलिए आइआरसीटीसी ने पेंट्रीकार का निरीक्षण किया। जांच के दौरान सबसे प्राथमिकता सफाई को दी गई। सफाई का जायजा लेने के साथ- साथ टीम ने यह देखा की पेंट्रीकार के कर्मचारियों ने यूनिफार्म पहना है या नहीं। आईकार्ड और राशन सामग्रियों की क्वालिटी भी परखी गई।

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close