बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। संस्कृत, लोक प्रशासन, होम साइंस जैसे पाठ्यक्रमों की ओर युवाओं का रुझान कम हो रहा है। स्कूली शिक्षा में भले ही इन विषयों पर पकड़ मजबूत है लेकिन महाविद्यालयों में युवा पीढ़ी कतरा रहे हैं। मास्टर डिग्री हासिल करने कदम नहीं उठ रहे हैं। ताजा आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हो रहा कि बिजनेस मैनेजमैंट, बैंकिंग और कम्प्यूटर साइंस में डिप्लोमा भी नहीं करना चाहते।

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध बिलासपुर, कोरबा, मुंगेली और पेंड्रारोड जिले के 105 स्नातक और स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में शिक्षण सत्र 2022-23 में प्रवेश की प्रक्रिया आरंभ है। दो चरणों में प्रवेश के बाद भी 40 प्रतिशत सीटें खाली हैं। कुलपति की विशेष अनुमति से अब तीसरी बार प्रवेश तिथि में वृद्धि करते हुए विद्यार्थियों को 30 सितंबर तक मौका दिया गया है। कोरोना महामारी के बाद उम्मीद से बहुत कम प्रवेश हुआ है।

इसके कारण कई महाविद्यालयों में तालाबंदी की नौबत आ चुकी है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रवेश्ा तिथि में वृद्धि की गई है। प्रवेश को लेकर जारी ताजा आंकड़ों में यह भी पता चला है कि स्नातक और स्नातकोत्तर के लगभग 35 विषयों में एक भी छात्र-छात्रा ने प्रवेश नहीं लिया है। संस्कृत, लोक प्रशासन, होम साइंस सहित बीबीए, बीसीए और डीसीए में बहुत ही कम छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है। जबकि पीजीडीसीए, राजनीति शास्त्र, हिंदी, जूलाजी, बाटनी, वाणिज्य,गणित,बायोलाजी जैसे विषयों के लिए बंपर आवेदन जमा हुए।

सत्र 2022-23 में प्रवेश

विवरण --- कुल सीट --- पंजीयन --- प्रवेश --- रिक्त

स्नातक --- 32100 --- 46045 --- 20123 --- 11977

स्नातकोत्तर --- 14553 --- 34210 --- 9570 --- 4983

40 प्रतिशत सीटें अब भी खाली

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से के महाविद्यालयों में लगभग 38 से 40 प्रतिशत सीटें अब भी खाली हैं। स्नातक में 37.4 तथा स्नातकोत्तर में 34.25 प्रतिशत सीटें खाली है। ए ग्रेड महाविद्यालयों में भी स्थिति इस साल खराब है। विद्यार्थियों का टोटा है। यही कारण है कि बार-बार विश्वविद्यालय को प्रवेश तिथि बढ़ाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

स्नातक पाठ्यक्रम

विषय --- कुल सीट --- प्रवेश --- रिक्त

बीएससी होम साइंस --- 70 --- 02 --- 68

बीएससी बायोटेक्नोलाजी --- 50 --- 11 --- 39

बीबीए --- 470 --- 137 --- 333

बीसीए --- 1550 --- 818 --- 732

डीसीए --- 1600 --- 696 --- 904

स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम

विषय --- कुल सीट --- प्रवेश --- रिक्त

एमए संस्कृत --- 90 --- 33 --- 57

एमए लोक प्रशासन --- 50 --- 04 --- 46

एमएससी कम्प्यूटर साइंस --- 235 --- 33 --- 203

पीजी डिप्लोमा बिजनेस मैनेजमेंट --- 315 --- 39 --- 276

पीजी डिप्लोमा बैकिंग --- 60 --- 10 --- 50

प्राचार्यों का मत

संस्कृत, लोक प्रशासन, होम साइंस जैसे विषय लोकप्रिय पाठ्यक्रम है। विदेश में जबरदस्त मांग है। हमारे यहां विगत कुछ वर्षों से इन पाठ्यक्रमों की ओर रुझान कम हो रहा है। युवाओं को लगता है कि इसमें रोजगार की संभावना कम है।

डा.संजय सिंह,प्राचार्य,सीएम दुबे पीजी कालेज

युवा अब अपने हिसाब से विषयों का चुनाव करते हैं। संस्कृत को लेकर काफी समय से यह स्थिति बनी हुई है। जिस तरह पर्यावरण विषय अनिवार्य है, उसी तरह संस्कृत को भी पढ़ाने को कदम बढ़ाने होंगे। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत है।

डा.एसआर कमलेश, प्राचार्य, विज्ञान महाविद्यालय

परंपरागत पाठ्यक्रमों पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। जिससे कि युवाओं को आकर्षित किया जा सके। प्रत्येक विषय का अपना एक अलग महत्व है। 35 से अधिक विषयों पर एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। इस पर विचार करना होगा।

डा.एसएल निराला, प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय सकरी

क्या कहता है विश्वविद्यालय प्रशासन

महाविद्यालयों में अभी प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है। अंतिम तिथि के बाद ही वस्तुस्थिति का पता चलेगा। इसके बाद ही आकलन संभव होगा। जिन विषयों में कम प्रवेश होगा उन पर विचार करेंगे।

प्रो.सुधीर शर्मा

कुलसचिव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय

Posted By: Abrak Akrosh

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