बिलासपुर। संगीत में जीवन से लेकर मरण तक कई इसके राग हैं। एक होता है सत्यसंगीत वह भक्ति का संगीत है। लोग संगीत में कई राग होते हैं। लोक संगीत दिलों को छूता है। इसमें लोग प्रभु के भजन गीत गाते हैं। संगीत किसी एक भाषा क्षेत्र का नहीं है, संगीत सभी का है। लोक संगीत हमारी संस्कृति की जान हैं। ये बातें राजस्थान के जैसलमेर से आए उस्ताद लालू ने कही।

विश्व सारंगी दिवस के पूर्व संध्या पर भारतीय सिंधु सभा पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के संयुक्त तत्वाधान में बिलासपुर में एक शाम संगीत के नाम कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में शामिल उस्ताद लालू ने कहा कि यह संगीत पुश्तैनी हैं, जिसे हम आठवीं पीढ़ी से निरंतर गाते आ रहे हैं और आज सिंधी राजस्थानी उर्दू व कई भाषाओं में मैं गीत गाता हूं। लेकिन लोक संगीत के दीवाने अब बहुत कम हैं। मैं बिलासुपर में पहली बार आया हूं। मुझे यहां आकर अच्छा लगा। यहां के लोगों से जो प्यार स्नेह मिला है। उससे मैं बहुत अभिभूत हूं। यहां भी कला और संगीत प्रेमी हैं। यह देखकर मुझे बहुत खुशी हुई।

बिलासपुर सिंधी समाज भी अपनी संस्कृति को सहेजने के लिए जो प्रयास कर रहा है। वह बहुत ही सराहनीय है। यहां भी लोक संगीत को चाहने वालों की संख्या बहुत है। इसलिए लोक संगीत का आज भी उतना ही महत्व है। इसे सुनने वाले और समझने वालों की कमी नहीं है। लोक संगीत हमे जीना सिखाता है।

सत्य व वस्तुस्थिति के महत्व के बारे में बताता है। लोक संगीत के बिना इसके प्रेमी खुद को अधूरा समझते हैं। इस अवसर पर उन्होंने चंद पंक्तियां कुछ लोकगीत गाकर सुनाए। बिलासपुर आगमन पर उनका भारतीय सिंधु सभा महिला विंग की राष्ट्रीय महामंत्री विनीता भावनानी प्रदेश महामंत्री, गरिमा साहनी, पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के संरक्षक डीडी आहूजा, मोहन जैसवानी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का पुष्पहार पहनाकर व गुलदस्ता देकर स्वागत किया।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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