बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

रेलवे ने टिकट काउंटर से लेकर खानपान, डारमेट्री व रिटायरिंग रूम की बुकिंग कैशलेस कर दी है। फिर भी ट्रेन में यह सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। कभी जुर्माना जमा करने की नौबत आती है और यात्री के पर नकद नहीं है तो बीच रास्ते में उतारने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इस दौरान विवाद भी होता है।

दो दिन पहले इसी तरह का एक मामला सामने आया। इसमें यात्री को बीच रास्ते में टीटीई ने उतार दिया। बेलगहना निवासी गोपाल कुशवाहा जनशताब्दी एक्सप्रेस में डोंगरगढ़ से बिलासपुर के लिए सफर कर रहे थे। उनके पास टिकट भी था। तिल्दा पहुंचते ही टीटीई पहुंचे और यात्री से टिकट दिखाने के लिए कहा। यात्री ने टिकट दिखाया। टीटीई ने कहा कि सही टिकट होने के कारण 380 रुपये जुर्माना लगेगा। यात्री यह राशि देने के लिए तैयार था पर जेब में नकद नहीं थे। इसलिए यात्री ने पेटीएम या कार्ड से जुर्माने की राशि भुगतान करने की बात कही। ट्रेनों में जिस तरह चोरी या पाकिटमारी से जैसे अपराध हो रहे हैं उसे देखते हुए यात्री नकद की बजाय कार्ड से पेटीएम से भुगतान करना ज्यादा पसंद करता हैं। शापिंग माल से लेकर हर छोटी-बड़ी दुकान, पेट्रोल पंप सभी जगह कैशलेस भुगतान की सुविधा रहती है। रेलवे ने भी कैशलेस को बढ़ावा देते हुए जनरल हो या आरक्षित टिकट या फिर स्टाल से खानपान खरीदने के लिए कैशलेस सुविधा मुहैया कराई है। रेलवे कैशलेस को लेकर बड़े-बड़े दावे भी करती है। सारे दावे ट्रेन तक पहुंचते ही समाप्त हो जाते हैं। यात्री चाहकर भी टीटीई को कार्ड या पेटीएम से भुगतान नहीं कर पाते। इस असुविधा का खामियाजा यात्री को भुगतना पड़ा। इस अव्यवस्था पर जहां यात्री ने नाराजगी जताई। वहीं इस पर रेलवे को गंभीरता से सोचने का सुझाव भी दिया। यात्री का कहना है कि टिकट रखने के बावजूद उतारा गया। इससे समय की बर्बादी हुई और काम भी नहीं हो सका।

ये सुझाव भी दिए

- जनशताब्दी का टिकट देते समय यात्री को बताया जाए कि उसका रिजर्वेशन हो सकता है। सामान्य टिकट नहीं मिलेगा या टिकट ट्रेन में बन जाएगा। इससे 10 या 50 रुपये के कारण आधे रास्ते में उतारना नहीं पड़ेगा।

- इसके अलावा रेलवे जब भी हो नियम में बदलाव करें तो उसका प्रचार- प्रसार करते हुए हर एक यात्री तक सूचना दी जाए। इससे यात्रियों को असुविधा नहीं होगी।