बिलासपुर। Bilaspur High Court News: एसईसीएल में हुई नियुक्तियों में अनियमतता का मामला उजागर करने वाले आरटीआइ कार्यकर्ता को धमकी दी जा रही है। यहां तक उन्हें रासुका के नाम से नोटिस भी जारी कर दिया गया है। इस मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मामले में एसईसीएल ने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है। वहीं प्रकरण में याचिकाकर्ता को प्रतिजवाब पेश करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी गई है।

मनेंद्रगढ़ निवासी सत्यपूजन मिश्रा आरटीआइ कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने अधिवक्ता जयप्रकाश शुक्ला के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने कुछ साल पहले एसईसीएल में हुई नियुक्तियों में गड़बड़ियों की जानकारी जुटाई थी। सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी हासिल करने पर पता चला कि नियुक्तियां फर्जी तरीके से हुई है। शिकायत के बाद एसईसीएल ने कार्रवाई भी की की थी। याचिका में बताया गया कि इसी बीच स्थानीय विधायक विनय जायसवाल ने ऐसे लोगों को कार्रवाई न होने देने का भरोसा दिलाया था।

साथ ही विधायक ने एसईसीएल को पत्र लिखकर कहा था कि याचिकाकर्ता मिश्रा की शिकायतें सही नहीं हंै। वे नियमित कार्य में व्यवधान डालने के लिए इस तरह की शिकायत करते रहते हैं। इस दौरान याचिकाकर्ता मिश्रा को विधायक द्वारा धमकी भी देने का आरोप है। इसके बाद याचिकाकर्ता को पुलिस अधीक्षक व कलेक्टर ने पत्र लिखकर रासुका की कार्रवाई करने नोटिस भी जारी किया था। जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस एनके व्यास की एकलपीठ में चल रही है।

इस मामले में एसईसीएल को भी नोटिस जारी किया गया था। प्रकरण में एसईसीएल ने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है। वहीं, अब याचिकाकर्ता को प्रतिजवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है।

एसईसीएल ने याचिकाकर्ता के तर्कों को बताया गलत एसईसीएल ने प्रकरण में अपने जवाब दे दिया है। इसमें एसइसीएल प्रबंधन ने याचिकाकर्ता की तर्कों को गलत बताया है। साथ ही नियुक्तियों को लेकर उठाए गए सवालों को भी गलत बताया है। अब इस मामले में याचिकाकर्ता को जवाब प्रस्तुत करना है।

Posted By: sandeep.yadav

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