बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

भारी बारिश के बीच किसानों ने धान की बोनी और रोपाई का काम पूरा किया। खेतों में धान के पौधे बढ़ने लगे हैं। बढ़ती फसल में अब लीफ ब्लाइट नामक बैक्टीरिया ने तेजी के साथ हमला करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले ये पौधों के ऊपरी हिस्से को अपने निशाने में ले रहा है। पौधों में इसका दुष्प्रभाव भी नजर आने लगा है। पौधे का ऊपरी हिस्सा हरा के बजाय हल्का लालिमा लिए दिखाई दे रहा है। धीरे-धीरे इसका असर जड़ की तरफ होने लगता है। लालिमा के बाद पौधे का बीच का हिस्सा पूरी तरह सूख जाता है और सफेद हो जाता है। किसानों के सामने परेशानी ये कि इस बैक्टीरिया से बचाव की कोई दवा अब तक कृषि विज्ञानियों ने बनाई ही नहीं है।

मुंगेली जिले के अलावा बिलासपुर जिले के दो ब्लॉक में लीफ ब्लाइट बैक्टीरिया के हमले की शिकायत ज्यादा मिल रही है। मुंगेली जिले में इसका व्यापक रूप से असर देखा जा रहा है। बिलासपुर जिले के तखतपुर व बिल्हा ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों के किसानों के खेतों में बैक्टीरिया के हमले की जानकारी मिली है। धान की खेती करने वाले किसानों को इस बार मौसम के उतार-चढ़ाव को लेकर सबसे ज्यादा मुसीबत झेलनी पड़ी है। बोनी वाले किसानों के सामने परेशानी ये कि भारी बारिश के कारण खेतों में पानी ज्यादा होने के कारण अधिक पानी को निकालने मशक्कत भी करनी पड़ी। रोपोई का काम इस बार पिछड़ गया। अब जबकि खेतों में धान के पौधे बढ़ने लगे हैं। किसान यूरिया सहित अन्य उर्वरकों का छिड़काव भी करने लगे हैैं। इसका असर भी दिखाई दे रहा है। धान के पौधे हरा-भरा दिखने लगा है। धान की फसल पर बैक्टीरिया ने हमला करना शुरू कर दिया है। लीफ ब्लाइट के हमले ने लहलहाते धान के हरे पौधों को बदरंग करने लगा है। बैक्टीरिया के हमले का असर भी दिखने लगा है।

धान की सुंगधित प्रजाति बैक्टीरिया को कर रही आकर्षित

कृषि विज्ञानियों का कहना है कि लीफ ब्लाइट बैक्टीरिया का हमला धान की सुगंधित प्रजाति में ज्यादा हो रहा है। धान की खुशबू बैक्टीरिया को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यही कारण है सुगंधित प्रजाति के पौधों पर ये हमला कर रहे हैं। इसमें हाइब्रिड,देसी किस्में जिसका उपयोग किसान लगातार करते आ रहे हैं,स्वर्णा,एचएमटी व दुबराज में बैक्टीरिया का ज्यादा असर दिखाई दे रहा है।

0 इन किस्मों पर बेअसर

बम्लेश्वर,एमपी एक हजार एक,महामाया व कर्मा मासुरी। ये कुछ ऐसी किस्में है जो इंदिरा गांधी कृषि विवि के कृषि विज्ञानियों ने विकसित किया है और अपनी देखरेख में उपचारित कराया है। इन किस्मों पर बैक्टीरिया का असर नहीं हो रहा है।

क्यों होता है लीफ ब्लाइट का हमला

ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ.आरकेएस तिवारी का कहना है कि मौसम में भारी उतार-चढ़ाव के अलावा भारी बारिश इसके बाद मौसम में तेज गर्मी और उमस के कारण यह बैक्टीरिया पनपता है। इसके अलावा उपचारित बीज के बजाय किसान लगातार देसी किस्मों को बिना उपचारित फसल लेते हैं। बीज का उपचार न करने के कारण बैक्टीरिया खेतों की मिट्टी में रहता है। मौसम में बदलाव के कारण यह ऊपर आ जाता है।

बैक्टीरिया को असरहीन करने ये करना जरूरी

अधिष्ठता व कृषि विज्ञानी डॉ.तिवारी का कहना है कि बाजार में बैक्टीरियो को नष्ट करने का कोई दवाई अब तक नहीं आई है। सिंचाई सुविधा वाले किसानों को खेत का पानी निकाल देना चाहिए। इसके बाद प्रति एकड़ 50 किलोग्राम पोटाश का छिड़काव करना चाहिए। खेतों को तब तक सूखा रखें जब तक धान के पौधों की पानी की आश्यश्कता ना हो। जिन किसानों के पास सिंचाई सुविधा नहीं है उनको खेत के मेढ़ को अच्छी तरह बांध देना चाहिए। इसके बाद प्रति एकड़ 50 किलोग्राम पोटाश का छिड़काव करे। सावधानी ये बरतनी होगी कि पोटाश के छिड़काव के बाद पानी दूसरे खेत में न जाने पाए। डॉ.तिवारी का कहना है कि बैक्टीरिया से फसल को बचाने यह एकमात्र उपाय है। फसल तो बच जाएगी पर उत्पादन में थोड़ा अंतर आएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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