बिलासपुर। छत्तीसगढ़ी लोक कला संस्कृति केंद्र एवं छत्तीसगढ़ी सृजन पीठ की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना एवं विश्वविद्यालय स्थापना दिवस पर चल रहे छत्तीसगढ़ी महोत्सव में डा. सीवी रामन विश्वविद्यालय में आदिवासी महोत्सव का आयोजन किया गया । यह आयोजन आदिवासी क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा किए गए कार्य और आदिवासियों के लिए किए गए कार्यों सहित आदिवासी गीत संगीत, लोक कला केंद्रित था। इस अवसर पर निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष महामहोपाध्याय डा. शिववरन शुक्ल, सचिव डा. मनीषा शुक्ला उपस्थित थे। इस अवसर पर विवि के गोद ग्राम के आदिवासी प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।

आदिवासी महोत्सव में मुख्य अतिथि डा. शिववरण ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का आदिवासी संस्कृति ही केंद्र बिंदु है। यहां हर आदिवासी को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है। यह कार्य विवि अपनी स्थापना से कर रहा है। आदिवासियों की शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़े होने के कारण प्रदेश का विकास तेजी से होगा। कार्यक्रम में विनायक आयोग के अकादमिक सदस्य प्रोफेसर उमेश मिश्रा ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में स्थापित इस विश्वविद्यालय की स्थापना से संस्थान के दूरदर्शिता और लोक कल्याणकारी होने का संदेश स्पष्ट होता है । निश्चित रुप से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में आदिवासियों को विश्वविद्यालय की स्थापना से लाभ मिल रहा है।

विश्वविद्यालय के कुलपति और कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर रवि प्रकाश दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ आदिवासी क्षेत्र है। खासकर कोटा इस क्षेत्र में शामिल किया जाता है। और आदिवासियों को विकास और उन्हें शिक्षा से जोड़ने के उद्देश से ही विश्वविद्यालय की स्थापना इस अंचल में की गई है। हम आदिवासियों का भविष्य शिक्षा के साथ गढ़ रहे हैं। इस अवसर पर निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की सचिव डा. मनीष शुक्ला, विश्वविद्यालय की समकुलपति डा. जयति चटर्जी उपस्थित थे। छत्तीसगढ़ी लोक कला एवं संस्कृति केंद्र अध्यक्ष डा. अरविंद तिवारी ने कार्यक्रम का आभार प्रकट किया।

आदिवासियों को शिक्षा से जोड़ना ही उद्देश्य: गौरव

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव गौरव शुक्ला ने विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से अब तक की आदिवासियों के उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अब तक आदिवासी क्षेत्र में विश्वविद्यालय किस तरह शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है । और अंचल के लोगों को कितनी सुविधा और सहता दी जा रही है । उन्होंने यह भी बताया कि आदिवासी क्षेत्र में पांच गांव को भी उन्नात भारत अभियान के तहत गोद लिया गया है।इसमें की निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्र में स्थापित विश्वविद्यालय के संकल्प को दोहराया और कहा कि यह निरंतर जारी रहेगा।

आदिवासी जनप्रतिनिधि हुए सम्मानित

इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गोद ग्राम के आदिवासी जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। इन जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र में बेहतर कार्य किया है। विश्वविद्यालय एवं आयोग के अध्यक्ष द्वारा इनकों सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में ग्राम अमने के सरपंच अश्विन खुसरो और रतखंडी के सरपंच मनोहर ध्रुव सहित अन्य आदिवासी प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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