बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सेंदरी नेशनल हाईवे में पंचर होने के कारण कोयला से भरा ट्रेलर खड़ा था। इससे देर रात एक बजे तेज रफ्तार ट्रक पीछे से टकरा गया। हादसे में ट्रक चालक की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। सूचना पर कोनी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और चालक के शव को सिम्स भेज दिया। शनिवार की सुबह स्वजन के आने के बाद शव को पोस्टमार्टम कराया गया।

बिहार के पटना के रहने वाला उमेंद्र कुमार यादव पिता विनेशर यादव (40) ट्रक चलाते थे। शनिवार की देर रात कोरबा की ओर से तेज रफ्तार से ट्रक चलाते हुए बिलासपुर की ओर आ रहे थे। रात एक बजे सेंदरी के पास पहुंचे। इसी दौरान ट्रक सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से टकरा गया। हादसा में ट्रक के सामने का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

इससे चालक केबिन में ही फंस गया। उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई। सूचना पर कोनी पुलिस की टीम जांच करने पहुंची। घंटों मशक्कत करने के बाद चालक के शव को बाहर निकाला गया। फिर सिम्स भेज दिया।

पुलिस ने घटना के बाद मृतक चालक के स्वजन को सूचना दे दी। शनिवार को सुबह स्वजन बिलासपुर पहुंचे और पोस्टमार्टम के बाद शव को साथ ले गए। घटना के बाद आरोपित ट्रेलर चालक फरार हो गया।

सिर्फ दो पैट्रोलिंग वाहन के सहारे हाईवे रोड में हादसा रोकने का प्रयास

ट्रैफिक पुलिस के पास हाईवे रोड में सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों की मानिटरिंग करने के लिए सिर्फ दो पैट्रोलिंग वाहन उपलब्ध हैं। दोनों गाड़ी का दायरा 24 किलोमीटर है। जिले में हाईवे रोड का दायरा 50-60 किलोमीटर है। ऐसी स्थिति में हाईवे पैट्रोलिंग स्टाफ को सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों की मानिटरिंग करने में परेशानी हो रही है।

इससे दुर्घटना भी नहीं थम रही है। जिले में दो साल के भीतर सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों से व ओवरटेक से 225 हादसे हुए। इसमें 75 लोगों की मौत हो गई। 110 से ज्यादा लोगों को गंभीर चोट लगी। बाइक व साइकिल सवार से लेकर कार, ट्रक चालक हादसे के शिकार हो चुके हैं। हादसों को रोकने के लिए पुलिस विभाग ने हाईवे पैट्रोलिंग वाहन की सुविधा शुरू की है। लेकिन क्षेत्रफल ज्यादा होने के कारण मानिटरिंग नहीं हो पा रही है।

सिंगल चालक के कारण हो रहे हादसे

ज्यादातर वाहन मालिक पैसा बचाने की फिराक में सिंगल चालक से ही गाड़ी चलवाते हैं। लंबा सफर यानी 24 घंटे गाड़ी चलाने के कारण चालक थक जाते हैं। इसके अलावा नींद भी पूरी नहीं होती है। निर्धारित समय पर माल पहुंचाने के प्रयास में चालक आराम नहीं कर पाते हैं। रात के समय गाड़ी चलाते-चलाते नींद लग जाती है। इसके कारण सड़क पर खड़ी गाड़ियों को ध्यान नहीं दे पाते हैं। इससे सड़क दुर्घटना हो जाती है। ट्रैफिक विभाग और आरटीओ सिंगल चालक वाहन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते हैं।

यहां सबसे ज्यादा दुर्घटना की आशंका

मोपका चौक

मोपका चौराहे पर सड़क की दोनों ओर से तेज रफ्तार से गाड़ी गुजरती है। सड़क के दोनों किनारे दुकान, ठेला, गुमटी खुल जाने के कारण आने के कारण वाहन नजर नहीं आते। वहां आसपास बोर्ड भी नहीं है। इसके चलते दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।

बेलतरा ब्लैक स्पाट

मेन रोड पर स्पीड ब्रेकर, रबर स्ट्रीप नहीं होने के कारण यहां आए दिन सड़क दुर्घटना होती है। यहां भी हादसे को रोकने के लिए कोई विशेष उपाय नहीं अपनाया गया है। कोरबा, दीपका रोड होने के कारण आए दिन हादसे होते हैं।

बहतराई चौक सरकंडा

यहां भी दो सड़कें आकर मिलती हैं। सड़क के दोनों किनारे दुकान होने के कारण सामने से आने वाले लोग नजर नहीं आते हैं। यहां भी दोनों किनारे स्पीड ब्रेकर लगाने की आवश्यकता है। ट्रैफिक नियंत्रण करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

रतनपुर शनिचरी बाजार

रतनपुर मार्ग में शनिचरी बाजार के पास भी स्पीड ब्रेकर व सूचना बोर्ड नहीं लगाने के कारण सड़क हादसे होते हैं। बिलासपुर से रतनपुर, कटघोरा से लेकर कोरबा तक चकाचक सड़क बनने के कारण चालक तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं।

दो साल में इतने लोगों की हुई मौत

खड़ी गाड़ियों से टकराकर हुए हादसे

साल ----- मौत ----- घायल

2020 ----- 18 ----- 27

2021 ----- 14 ----- 17

ओवरटेक से हुए हादसे

साल ----- हादसे ----- मौत ----- घायल

2020 ----- 127 ----- 42 ----- 69

2021 ----- 95 ----- 30 ----- 33

इन्होंने कहा-

हाईवे रोड में सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों की निगरानी करने के लिए दो पैट्रोलिंग वाहन की सुविधा है। दोनों रात में अपने-अपने क्षेत्र में खड़े गाड़ियों में पट्टी लगाते हैं, ताकि कोई हादसा न हो। दुर्घटना रोकने हम अपने तरफ से प्रयास कर रहे हैं।

रोहित कुमार बघेल, एएसपी ट्रैफिक बिलासपुर

Posted By: sandeep.yadav

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