बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंगदान को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश जारी किया और राज्य शासन ने महज तीन घंटे के भीतर छत्तीसगढ़ में केडेवर ट्रांसप्लांट को मंजूरी दे दी है। इसके लिए राज्य सरकार ने प्रविधान कर दिया है। तय प्रविधान के अनुसार अब राज्य में किडनी,लीवर,लंग्स,हार्ट और पैंक्रियाज के अलावा मृत व्यक्ति की त्वचा जस्र्रतमंदों को मिल सकेगी। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जिसको मानव अंगों की जस्र्रत है। छत्तीसगढ़ सरकार ने केडेवर ट्रांसप्लांट या मृतकों के अंगों के दान को अनुमति दे दी है।

राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के बाद अब स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) में शामिल चिकित्सा विशेषज्ञ उन अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे जिन्होंने केडेवर ट्रांसप्लांट के लिए आवेदन पेश करते हुए अनुमति मांगी है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम तय प्रविधानों के तहत स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर का निरीक्षण करेगी। प्रविधानों के अनुस्र्प सुविधा मिलने की स्थिति में संबंधित अस्पताल प्रबंधन को अंग प्रत्यारोपण की अनुमति दी जाएगी।

इस संबंध में संचालनालय ने 16 अगस्त को आदेश जारी कर दिया है। केडेवर ट्रांसप्लांट की अनुमति मिलने के बाद अब अंगदान की प्रक्रिया दो तरह से होगी। अब तक की व्यवस्था के अनुसार जीवित रहते अपने अंगदान करने की घोषणा पत्र भरकर स्वास्थ्य विभाग में जमा करता है। जिन व्यक्तियों को अपना अंग दान करना है वे जीवित रहते इस तरह की घोषणा पत्र भर सकेंगे। संबंधित व्यक्ति के मृत होने के बाद उनके शरीर के विभिन्न् अंगों को दान करने के लिए स्वजन की सहमति अनिवार्य होगी। उनकी सहमति के बाद ही अंग निकाले जाएंगे।

बनेगी ब्रेन डेथ कमेटी

केडेवर ट्रांसप्लांट को लेकर शासन द्वारा अनुमति देने के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में ब्रेन डेथ कमेटी बनेगी। कमेटी की अनुशंसा के बाद ही मृत व्यक्ति के विभिन्न् अंगों को निकालने और जस्र्रतमंदों को ट्रांसप्लांट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

दो निजी अस्पतालों ने कराया पंजीयन

केडेवर ट्रांसप्लांट के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास राजधानी रायपुर के दो निजी अस्पतालों रामकृष्ण केयर और बालाजी अस्पताल ने पंजीयन के लिए आवेदन जमा किया है।

हाई कोर्ट में जनहित याचिका पर हो रही सुनवाई

बिलासपुर निवासी आभा सक्सेना ने जनहित याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ में केडेवर ट्रांसप्लांट की अनुमति मांगी है। याचिकाकर्ता खुद ही लीवर की बीमारी से ग्रसित है। चिकित्सकों ने उनको लीवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी है। याचिकाकर्ता ने अपने अलावा छत्तीसगढ़ अलग-अलग अंगों की बीमारी से ग्रसित लोगोंकी जानकारी भी दी है जिनको ट्रांसप्लांट कराना है। जनहित याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य शासन को इस संबंध में केडेवर ट्रांसप्लांट को राज्य में अनुमति देने के संबंध में जानकारी दे दी है। शासन के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तिथि तय कर दी है।

छग में 250 मरीज ऐसे जिनको चाहिए महत्वपूर्ण अंग

छत्तीसगढ़ में गंभीर बीमारी से ग्रसित 250 मरीज ऐसे हैं जिनको ट्रांसप्लांट के लिए मानव अंगों की सख्त जस्र्रत है। ट्रांसप्लांट से ही उनको नया जीवन मिल सकता है। इन मरीजों को किडनी,लंग्स,लीवर व हार्ट की जस्र्रत है। इस तरह के अंग दो व्यक्ति ही दे सकते हैं। रक्त संबंधी या फिर ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति से ही महत्वपूर्ण अंग लेकर प्रत्यारोपण किया जा सकता है। एक बे्रन डेड व्यक्ति आठ अलग-अलग लोगों को जीवन दे सकता है।

छग में अभी लाइव डोनर ट्रांसप्लांट

केंद्र सरकार ने वर्ष 1994 में पारित ट्रांसप्लांट ऑफ ह्युमन ऑर्गंस एक्ट को वर्ष 2011 में जस्र्री शर्तों के साथ संशोधित किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे स्वीकृत कर सिर्फ लाइव डोनर ट्रांसप्लांट की अनुमति दी है। ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान के लिए अलग से सेल बनाना होगा। राज्य सरकार ने सोटो का गठन कर दिया है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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