राधाकिशन शर्मा. बिलासपुर। Unmukt Project in Chhattisgarh: सुप्रीम कोर्ट ने उन्मुक्त योजना के तहत सजायाफ्ता उन कैदियों की रिहाई को कहा है जो आचरण समेत राज्य सरकार के अन्य नियमों के अनुसार जेल से छोड़े जाने के लिए पात्र हैं। ऐसे कैदियों की जेल से रिहाई के लिए अलग-अलग राज्य का अपना नियम कानून है। सजा के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार कुछ ज्यादा ही सख्त है। यहां के जेलों में बंद सजायाफ्ता कैदियों को 19 साल की सजा काटे बिना रिहाई नहीं दी जाती है।

शीर्ष अदालत ने उन्मुक्त योजना के क्रियान्वयन के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश व बिहार राज्य को शामिल किया है। वहां इसे लेकर 15-15 साल तक सजा का प्रविधान है। जिन कैदियों की रिहाई की जानी है, उनकी प्रक्रिया चार महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसमें निचली अदालत में सुनवाई, जेल मुख्यालय की सहमति, राज्य शासन की औपचारिकताएं आदि शामिल हैं। इस पूरी प्रक्रिया में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सहभागिता रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निर्देश जारी कर दिया है। एक अगस्त से योजना का क्रियान्वयन भी शुरू किया गया है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के विधिक सहायता अधिकारी शशांक दुबे ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने सजायाफ्ता कैदियों की लंबी सजा के बाद रिहाई के लिए प्राविधान बनाया है। प्रविधान के अनुसार शासन कमेटी की सिफारिश के साथ ही कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रिहाई दी जानी है।

राज्य शासन अपने ही बनाए नियमों का गंभीरता के साथ पालन नहीं कर रही है। इसे लेकर शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने उन्मुक्त योजना के तहत दोषमुक्त बंदियों की समीक्षा कर रिहाई का आदेश जारी किया है। योजना सफल रही तो सभी राज्यों में इसे लागू किया जाएगा।

यह है कार्ययोजना

जेल मुख्यालय को 15 दिनाें के भीतर अपनी सहमति देनी होगी। दो महीने के भीतर राज्य शासन को जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। इसके बाद 15 दिनों के भीतर रिहाई की प्रक्रिया जेल मुख्यालय को पूरी करनी होगी। इसमें राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सहभागिता रहेगी। निचली अदालत में प्रकरण दर्ज करने से लेकर बंदियों के लिए विधिक सहायता उपलब्ध कराने का कार्य भी प्राधिकरण के जिम्मे रहेगा।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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