बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। उसलापुर रेलवे स्टेशन शहर का दूसरा प्रमुख स्टेशन के रूप में विकसित हो रहा है। लगभग यहां आधे से ज्यादा काम हो चुके हैं। आगामी दिनों में दुर्ग से आकर कटनी सेक्शन में जाने वाली ट्रेनें बिलासपुर की जगह इसी स्टेशन में ठहरेंगी। हमसफर एक्सप्रेस समेत कुछ ट्रेनों को पहले बाइपास से सीधे उसलापुर स्टेशन में रोका जा रहा है।

शहर के भीतर दो रेलवे स्टेशन हैं। एक बिलासपुर और दूसरा उसलापुर। जोनल स्टेशन होने के कारण बिलासपुर में लगभग यात्रियों की आवश्यकतानुसार सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। यहां आने से यात्रियों को लगता है कि किसी बड़े महानगर के रेलवे स्टेशन में हैं। पर उसलापुर रेलवे स्टेशन को विकसित करने को लेकर पहले कोई योजना नहीं थी। कुछ साल पहले ही इसे दूसरा बड़ा स्टेशन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया। बजट स्वीकृत के साथ टेंडर आदि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब तीन साल से यहां निर्माण कार्य चल रहा है। सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए रेल प्रशासन चरणबद्ध कार्य करा रहा है।

इसमें स्टेशन के बाहर का क्षेत्र (सर्कुलेटिंग एरिया) का सुंदरीकरण, स्टेशन बिल्डिंग के सामने रोड का निर्माण, मुख्य प्रवेश द्वार का चौड़ीकरण, दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए लिफ्ट एवं रेैंप, अतिरिक्त फुटओवर ब्रिज का निर्माण, पर्याप्त मात्रा में पंखे, बेहतर लाइटिंग व्यवस्था, साइनेजेस, कोच इंडिकेशन बोर्ड, ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड, बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां, एप्रोच रोड, प्रतीक्षालयों का नवीनीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। कुछ काम और बचे हैं, जिसे पूरा करने के लिए ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं। यह होते ही उन सभी स्टेशनों का बिलासपुर स्टेशन में आगमन बंद हो जाएगा, जो दुर्ग-रायपुर की ओर आकर कटनी सेक्शन में जाती हैं। इसमें जम्मूतवी एक्सप्रेस, संपर्कक्रांति एक्सप्रेस जैसे प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों को दाधापारा-उसलापुर बाइपास रेल लाइन से चलाने की तैयारी की जा रही है।

ऐसे होगी परिचालन के समय में बचत

वर्तमान में दुर्ग-रायपुर से आकर कटनी सेक्शन जाने वाली ट्रेनों को बिलासपुर रेलवे स्टेशन में 20 से 25 मिनट रोकना पड़ता है। सामान्यत: ट्रेनों का स्टापेज 10 या 15 मिनट ही दिया जाता है। बिलासपुर में इन ट्रेनों को इतनी देर रोकने की मुख्य वजह इंजन बदलना है। रायपुर-दुर्ग से जब ट्रेन बिलासपुर में आती है तो इंजन हावड़ा छोर पर आता है। इसके बाद वापस इस इंजन को पीछे की तरफ जोड़ा जाता है। तब ट्रेन कटनी की ओर रवना होती है। इस व्यवस्था से कम से कम 10 से 15 मिनट परिचालन समय में बचत होगी। इसके अलावा जोनल स्टेशन में ट्रेनों का दबाव भी कम होगा।

तीन प्लेटफार्म, ठहरती हैं 36 ट्रेनें

उसलापुर रेलवे स्टेशन में अभी तीन प्लेटफार्म हैं। तीनों प्रमुख हैं और सभी का उपयोग भी होता है। दरअसल इस स्टेशन में 36 ट्रेनें ठहरती हैं। इनमें 18 अप व 18 डाउन दिशा की ट्रेनें हैं। कुछ ट्रेनों के परिचालन के दिन तो इस स्टेशन में पैर रखने की जगह नहीं रहती।

राजस्व लाभ, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

उसलापुर स्टेशन में ज्यादा से ज्यादा ट्रेनों का ठहराव होने से वहां व्यवसाय के रास्ते खुलेंगे। इसके अलावा वाणिज्यिक विकास होगा। इसका सीधा लाभ स्टेशन के व्यापारियों को मिलेगा। इसके अलावा रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

अब तीन लिफ्ट की सुविधा

उसलापुर रेलवे स्टेशन विकसित हो रहा है। इसका अंदाजा उपलब्ध नई सुविधाओं से लगाया जा सकता है। इन्हीं में एक लिफ्ट है। उसलापुर में एक दौर था, जब एक लिफ्ट बनाने के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। वहां वर्तमान में तीन लिफ्ट की सुविधा है। बुजुर्ग, दिव्यांग के अलावा अन्य यात्रियों के लिए यह सुविधा सबसे बड़ी है।

Posted By: Abrak Akrosh

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