बिलासपुर। एक तरफ तो कोरोना संक्रमण के मामले धीरे-धीरे नियंत्रण में आता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ वायरस का माइल्ड असर होने के बाद भी बुजुर्गों पर यह भारी पड़ जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि इस माह के 22 दिनों में 25 की कोरोना की वजह से जान चली गई है। जिसमें से 19 मृतक की उम्र 60 साल से ऊपर है।

स्वास्थ्य विभाग राहत की सांस ले रहा है कि दिनोंदिन कोरोना की रफ्तार कम होती जा रही है। लेकिन कोरोना की वजह से होने वाली मौत ने चिंता को बरकरार रखा है। क्योंकि सामान्य कोरोना मरीज तो पांच से सात दिन में ठीक हो जा रहे हैं, लेकिन वैसे बुजुर्ग जो किसी दूसरे बीमारी से ग्रसित चल रहे हैं, यदि वे कोरोना पाजिटिव हो जा रहे हैं तो यह दिक्कत पैदा कर दे रहा है।

वायरस की वजह से इनकी हालत खराब हो जा रही है और कुछ मामलों में इनकी जान चली जा रही है। वही अब इस तरह के मौत के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मौजूदा स्थिति में बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखा जाए और इन्हें घर में ही रखे, ताकि ये कोरोना वायरस से बचे रहे हैं। यदि ऐसा किया जाता है और बुजुर्ग सुरक्षित रहते हैं। फ़ौरन मौत के मामलों पर भी लगाम लगाया जा सकता है।

इस तरह हो रहीं मौतें

तीन जनवरी- एक, चार जनवरी- दो, छह जनवरी- एक, नौ जनवरी- दो, 10 जनवरी- चार, 11 जनवरी- एक, 12 जनवरी- एक, 15 जनवरी- तीन, 17 जनवरी- पांच, 18 जनवरी- दो, 19 जनवरी- एक, 20 जनवरी- दो

आक्सीजन लेवल कम होने से बज रही खतरे की घंटी

दूसरी लहर की तरह ही तीसरी लहर में जिस मरीज की आक्सीजन लेवल कम हो रहा है, वैसे ही खतरे की घंटे बज जा रही है। इसकी मुख्य वजह दूसरे लहर में कहर मचाने वाला डेल्टा वैरियंट अब भी सक्रिय हैं, जो लोगों को संक्रमित कर रहा है। ये जब फेफड़े तक पहुंच जाता है तो मरीज का आक्सीजन लेवल कम करने लगता है। बुजर्गों के साथ अब ऐसे ही हालात बन रहे हैं।

Posted By: anil.kurrey

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