बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)।Visit of Coal Minister: दिल्ली से विशेष विमान से बिलासपुर पहुंचे केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी को कोरबा पहुंचने के लिए हेलीकाप्टर नहीं मिल सका और उन्हें 65 किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से करना पड़ा। इसकी वजह से निर्धारित कार्यक्रमों में दो घंटे विलंब हुआ। राज्य में एक ही हेलीकाप्टर है। उसे लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बिलासपुर के रतनपुर मंदिर में दर्शन करने गए थे।

बुधवार को सुबह 11:15 बजे मंत्री जोशी बिलासपुर के चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंचे। यहां से उन्हें हेलीकाप्टर से कोरबा जिले के गेवरा पहुंचना था, लेकिन हेलीकाप्टर की व्यवस्था नहीं हो सकी। दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बिलासपुर प्रवास पहले से निर्धारित था। निजी कंपनी से हेलीकाप्टर किराए पर लेने की कोशिश की गई, पर वह भी उपलब्ध नहीं हो सका। लिहाजा मंत्री जोशी रतनपुर-पाली सड़क मार्ग से दो घंटे विलंब से 1:30 बजे गेवरा पहुंचे।

साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के गेवरा हाउस में भोजन के बाद तीन बजे दीपका खदान पहुंच कर व्यू पाइंट से खदान का निरीक्षण किए। उनके साथ कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल, एसईसीएल के अध्यक्ष सहप्रबंध निदेशक (सीएमडी) एपी पंडा भी मौजूद रहे। देर शाम तक मेगा प्रोजेक्ट गेवरा व कुसमुंडा खदान का निरीक्षण करने के बाद गेवरा हाउस में अफसरों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने खदानों में उपलब्ध संसाधन व श्रमबल का ब्योरा लिया, साथ ही उत्पादन और डिस्पैच बढ़ाने पर जोर दिया।

खदान के नीचे चलता रहा प्रदर्शन, ऊपर से निरीक्षण कर मंत्री लौटे

दीपका खदान के बाहर पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे भू-विस्थापित कोयला मंत्री के आगमन की खबर से कोयला अधिकारियों से संपर्क कर मुलाकात के लिए समय मांगा। लेकिन व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए मना कर दिया गया।

इससे नाराज खदान के बाहर बैठे भू-विस्थापित कोयला मंत्री के निरीक्षण के ठीक एक घंटा पहले खदान के नीचे उतर गए और सावेल मशीन के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए काम बंद करा दिए। खदान में भू-विस्थापित विरोध प्रदर्शन करते रहे और खदान के ऊपर बने व्यू स्थल से निरीक्षण कर मंत्री जोशी लौट गए।

इसलिए सबसे पहले कोयला मंत्री पहुंचे एसईसीएल

कोयला उत्पादन को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय व कोयला मंत्रालय संयुक्त समीक्षा के दूसरे दिन ही कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी एसईसीएल की खदानों से निरीक्षण की शुरुआत की। कोल इंडिया की आठ संबद्ध कंपनियों में एसईसीएल सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है। कोल इंडिया के कुल उत्पादन में एसईसीएल की 25 फीसद भागीदारी है। चालू वित्तीय वर्ष में कोल इंडिया के सामने 6,700 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य है। इसमें एसईसीएल की हिस्सेदारी 1,720 लाख तय की गई है।

इन्होंने कहा

मंत्रालय से संदेश 11 बजे के बाद मिला था। पहले से केंद्रीय मंत्री के आने की कोई अधिकारिक जानकारी नहीं थी। हेलीकाप्टर उपलब्ध कराना राज्य सरकार का विषय है।

हरिशंकर पैकरा

कोरबा, प्रोटोकाल अधिकारी

Posted By: anil.kurrey

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