मुंगेली, बिलासपुर । ग्राम खैरा सेतगंगा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक गर्भवती महिला को प्रसुती के लिए लाया गया था, लेकिन उस दौरान अस्पताल में ताला लगा मिला। उपचार के लिए अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे। बताया गया कि 3 डॉक्टरों की ड्यूटी है, लेकिन तीनों एक साथ छुट्टी पर हैं।

इससे भी बड़ी समस्या तब खड़ी हुई जब अस्पताल में ड्यूटी पर कोई नर्स भी नहीं थी। महिला तड़पती रही और अंततः अस्पताल के दरवाजे के सामने ही उसने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ समय बाद ही शिशु की मौत हो गई। महिला की हालत भी गंभीर बताई जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार की रात लगभग 10 बजे खैरा सेतगंगा की 36 वर्ष महिला रविता पति संतोष टंडन को प्रसव पीड़ा हुई। उसे उसके घर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खैरा सेतगंगा लाया गया, लेकिन अस्पताल के मुख्य दरवाजे पर ताला गला था।

यहां महिला काफी देर तक प्रसव पीड़ा से जूझती रही और परिजन उसे लेकर भटकते रहे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 24 घंटे आपातकालीन सेवा के लिए डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की तैनाती अनिवार्य की गई है। बताया गया कि अस्पताल में तीन डॉक्टर पदस्थ हैं, लेकिन सभी एक साथ छुट्टी पर गए हैं।

अस्पताल के चौकीदार से लेकर नर्स तक छुट्टी पर हैं। अस्पताल की दीवार पर डॉक्टर का नंबर लिखा गया है। परिजनों ने जब इस नंबर पर फोन किया तो वहां से लापरवाही पूर्ण जवाब देकर फोन रख दिया गया।

15 मिनट बाद गंभीर स्थिति में प्रसव हुआ और इसके कुछ समय बाद इलाज नहीं मिलने से शिशु की मौत हो गई। लोगों ने बताया कि इस अस्पताल के क्षेत्र के अंतर्गत करीब 70 गांव आते हैं।

प्रतिदिन एक या दो डिलीवरी केस आता है। इससे पहले भी इसी अस्पताल में प्रसव पीड़ा लेकर पहुंची एक महिला को उपचार न मिलने से जच्चा और बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद डॉक्टर और क्षेत्र के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। बताया जा रहा है कि रात के वक्त हमेशा ही अस्पताल में ताला लगा होता है और यहां रात्रिकालीन ड्यूटी कोई नहीं करता।