धीरेंद्र सिन्हा, बिलासपुर। पर्यावरण को संरक्षित रखना हम सब के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। हम इस पर चिंतन तो करते हैं, लेकिन वाजिब कदम उठाने से अक्सर पीछे रह जाते हैं। 40 छात्रों के एक दल के सामने एक ऐसी ही चुनौती आई। राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े बिलासपुर के इन छात्रों को एक प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिला। एक बड़े रकबे में फैली जमीन वर्षों से झाड़ियों और खरपतवारों से पटी हुई थी। इसका बड़ा हिस्सा बंजर था। आस-पास कुछ गांव थे, जहां पर्यावरणीय परिस्थितियां बहुत बेहतर नहीं थीं। छात्रों ने इस जगह की तस्वीर बदलने का निर्णण किया। कड़ी मेहनत के बाद अब यहां फलों का विशाल उद्यान नजर आ रहा है। यहां दो सूखे तालाब भी थे, जिन्हें अब जीवनदान मिल चुका है। यहां की पूरी पारिस्थितकीय संरचना अब बदल चुकी है।

पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए सीएमडी पीजी महाविद्यालय के 40 स्टूडेंट ने गजब का कमाल किया है। ग्राम नेवसा के लोगों को एकजुट कर ग्राम पंचायत से जमीन लेकर फलोउद्यान तैयार कर लिया है। एक साल से छात्र इसमें जुटे हुए हैं। एनएसएस के सहयोग से गांव के दो तलाबों के संरक्षण का भी बीडा उठाया है। जिससे की पर्यावरण का संतुलन बनाकर ग्रामीणों को स्वस्थ्य के प्रति जागरूक किया जा सके। फलोउद्यान में अब फल आने की तैयारी है। जिसे गांव के बधाों को पहले दिया जाएगा। स्टूडेंट के इस कदम की खूब सराहना हो रही है।

अमरकंटक अचानक मार्ग स्थित कोटा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत पटेता के ग्राम नेवसा में छात्रों ने फलोद्यान तैयार किया है। वर्ष 2015-16 से स्टूडेंट्स पर काम कर रहे हैं। वन विभाग ने सीएमडी कॉलेज को यह जमीन प्रदान की है। 2 साल पहले इस जमीन को छात्रों ने सिंचाई के लायक बना कर इसमें पौधे लगाए थे जो अब ढाई से 3 फीट के हो चुके हैं। स्टूडेंट में यहां आम, जामुन, नीम, कटहल, बेर, करौंदा, अमरूद, बेल और कुछ औषधीय पौधे भी लगाए हैं।

इन छात्रों का मनना है कि पर्यावरण में हरियाली बहुत जरूरी है जिसके लिए फलदार वृक्ष की अत्यंत आवश्यकता है। ग्रामीण अंचल के बधो ज्यादातर पौष्टिक फल से दूर रहते हैं या फिर जागरूकता नहीं होने के कारण इसका सेवन भी ठीक से नहीं कर पाते हैं। ऐसे में गांव का विकास कर सोच में भी परिवर्तन लाया जा सकता है, जिसका असर पर्यावरण पर दिखेगा। छात्रों के इस कार्य में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी प्रोफेसर पीएल चंद्राकर की रणनीति रही है। एनएसएस के बधाों को यह जवाबदारी दी गई है कि वे हर सप्ताह इसकी मॉनिटरिंग करने के लिए यहां जाते हैं।