बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। शारदीय नवरात्र की आज पंचमी तिथि है। श्रद्धालु स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करेंगे। घरों से लेकर देवी मंदिरों में विशेष श्रृंगार होगा। माता को फलों का भोग अर्पित किया जाएगा। ऐसे में माता की आराधना का विस्तृत जानकारी आवश्यक है। ताकि पूजा का पुण्य लाभ मिल सके।

ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज तिवारी का कहना है कि स्कंदमाता की स्वरूप काफी प्यारा है। मां दुर्गा की स्वरूप स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं, जिसमें दो हाथों में कमल लिए हैं, एक हाथ में कार्तिकेय बाल रूप में बैठे हुए हैं और एक अन्य हाथ में मां आशीर्वाद देते हुए नजर आ रही हैं। बता दें कि मां का वाहन सिंह है, लेकिन वह इस रूप में कमल में विराजमान है। पूजा में सबसे पहले कलश की पूजा करेंगे। इसके बाद मां दुर्गा और उनके स्वरूप की पूजा आरंभ करें।

सबसे पहले जल से आचमन करें। इसके बाद मां को फूल, माला चढ़ाएं। इसके बाद सिंदूर, कुमकुम, अक्षत आदि लगाएं। फिर एक पान में सुपारी, इलायची, बताशा और लौंग रखकर चढ़ा दें। इसके बाद मां स्कंदमाता को भोग में फल में केला और इसके अलावा मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद जल अर्पित कर दें। इसके बाद घी का दीपक, धूप जलाकर मां के मंत्र का जाप करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में दुर्गा मां के साथ स्कंदमाता की आरती करें।

देवी मंदिरों में शाम को होगी महाआरती

शहर के काली मंदिर तिफरा, सरकंडा स्थित श्रीपीतांबरा पीठ मां बगलामुखी देवी मंदिर, सतबहिनिया मंदिर, बंधवापारा, हरदेव लाल मंदिर, शनिचरी, मां काली मंदिर कुदुदंड, दुर्गा मंदिर जरहाभाठा, दुर्गा मंदिर दयालबंद, दुर्गा मंदिर पुलिस लाइन, दुर्गा मंदिर, जवाली पुल, महामाया मंदिर, गणेश नगर व त्रिपुर सुंदरी मंदिर कोतवाली, मरीमाई मंदिर रेलवे परिक्षेत्र न्यू लोको कालोनी में 30 सितंबर यानी पंचमी की शाम महाआरती की जाएगी। इसके बाद षष्ठी को कात्यायनी सप्तमी को कालरात्रि, अष्टमी को महागौरी व नवमी के दिन सिद्धदात्री स्वरूप की पूजा की जाएगी। इस दौरान भक्त कठोर व्रत का पालन करेंगे। विधिवत दुर्गा सप्तशती का पाठ व दुर्गा चालीसा पढ़ना जारी रखेंगे।

Posted By: Abrak Akrosh

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close