Apara Ekadashi 2022: बिलासपुर। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी कहा जाता है। इस साल यह 26 मई को पड़ रही है। श्रद्धालुओं को इस एकादशी का खास इंतजार रहता है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो अपरा एकादशी पर यदि अपार समृद्धि चाहिए तो भगवान विष्णु व लक्ष्मीजी की विधिवत पूजा करनी चाहिए। प्रमुख 10 नियमों का पालन अनिवार्य है। कथावाचक पंडित वीरेंद्र दुबे के मुताबिक कथा के अनुसार महीध्वज नामक एक राजा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए एक ऋषि ने यह व्रत रखा था और अकाल मृत्यु से मरे राजा को व्रत का फल दे दिया। इसके प्रभाव से प्रेत योनि से राजा की आत्मा मुक्त हुई और अंतत: उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी।

ज्योतिषाचार्य पंडित डा.सत्यनारायण तिवारी के मुताबिक हिंदू पंचांग के अनुसार अपरा एकादशी को अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। अपरा एकादशी पर विष्णु भगवान और लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना का महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु पूरा दिन व्रत रखकर शाम के समय भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे उन्हें मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अपनी गलतियों की क्षमा प्रार्थना के लिए अपरा एकादशी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से साधक और व्रती को भगवान विष्णु की कृपा अवश्य मिलती है। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की कृपा बरसती है। साधक का पारिवारिक जीवन सुखमय बीतता है।

अपरा एकादशी पूजन के 10 नियम

01 सूर्योदय से पहले उठें और अपने स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

02 स्वच्छ वस्त्र पहनकर विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए।

03 पूर्व दिशा की तरफ एक पीढ़े पर पीला कपड़ा बिछाएं।

04 भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को इसमें स्थापित करें।

05 इसके बाद धूप दीप जलाएं और कलश स्थापित करें।

06 भगवान को फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग अर्पित करें।

07 व्रती स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएं।

08 अपने दाएं हाथ में जल लेकर अपनी विपदाओं को समाप्त करने को प्रार्थना करें।

09 निराहार रहकर शाम के समय अपरा एकादशी की व्रत कथा सुनें।

10 व्रत खत्म होने के बाद फलाहार करें। शाम शुद्ध घी का दीपक जलाएं।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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