दंतेवाड़ा। पुलिस की नक्सल विरोधी मुहिम को आज एक बड़ी सफलता मिली है। माओवाद की भर्त्सना कर रहे ग्रामीणों की समझाइश तथा गांव को आदर्श गांव बनाने की सोच के साथ तेरह नक्सलियों ने आत्मसमर्पण की ओर कदम बढ़ाया है। जिला पुलिस के लिए अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

बुधवार को बैलाडीला क्षेत्र के टिकनपाल के ग्रामीण गांव की एक महिला समेत तेरह लोगों को, जिनका संबंध नक्सलियों से है, आत्मसमर्पण कराने उन्हें अपने साथ एसपी आवास लेकर पहुंचे थे। इस पर एसपी कमलोचन कश्यप ने सरेंडर करने वाले नक्सलियों को शासन की पुर्नवास नीति का लाभ दिलाने और गांव का विकास का भरोसा दिलाया। सरेंडर करने वालों में 7 कमेटी सदस्य तथा शेष जनमिलिशिया मेम्बर बताए गए है।

सात साल से जुडे़ थे नक्‍स‍ली संगठन से

इनमें लिंगा राम पिता गोरे (30), सुकमन पिता हुंगा ताती (32), छन्नू पिता पोज्जा बारसा (35), वामन पिता कोसा ताती, बोदे उर्फ आयती पिता गुड्डी ताती, सोमडू ताती पिता हुंगा ताती, ताती जोगा पिता बामन (22), भीमा बारसे पिता बदरू बारसे, रमेश बारसे पिता हुंगा बारसे, पिंकू राम पिता भीमा ताती (19), बासु पिता जोगा, भीमा ताती पिता हुंगा, लक्ष्मण पिता भीमा शामिल है।

एसपी के अनुसार उक्त सभी गत सात वर्षों से संगठन से जुड़कर माओवाद गतिविधियों को संचालित कर रहे थे। सभी टिकनपाल के निवासी है। समर्पण कराने पहुंचे ग्रामीणों का कहना था कि सलवा जुडूम से पहले टिकनपाल एक खुशहाल गांव था, लेकिन माओवाद हिंसा की परिणति स्कूल ध्वस्त कर दिए गए। ग्रामीणो पर नक्सलियों का अत्याचार बढ़ गया। वे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे थे। गांव का विकास ठहर सा गया था।

जनता के जागरुक होने पर होगा खात्‍मा

इसलिए गांव के बड़े-बुर्जुगों ने मिलकर यह तय किया कि गांव को आदर्श गांव बनाने के लिए वे माओवाद की भर्त्सना करेंगे। गांव के भटके युवाओं को सही राह दिखाएंगे। उनकी समझाईश के बाद उन्होंने नक्सली संगठन से जुड़ी गांव की एक महिला समेत तेरह लोगों ने आत्मसर्पण की ओर कदम बढ़ाया है।

एसपी श्री कश्यप ने कहा कि नक्सलवाद का खात्मा तभी संभव है जब जनता जागरूक होगी। इस उपलब्धि का श्रेय जनता को जाता है। ग्रामीणों को सुरक्षा देने के साथ गांव के विकास में भी पुलिस सहभागी बनेगी। इस मौके पर डीआईजी सीआरपीएफ डीपी उपाध्याय, कमांडेंट 111 बटालियन, एएसपी एसआर भगत, किरंदुल टीआई राजेंद्र देवदास उपस्थित थे।