प्रदीप गौतम, दंतेवाड़ा। जिले के कटेकल्याण ब्लाक के पखनचूहा पंचायत के ग्रामीण वर्षों से नाले पर पुलिया बनाने की मांग कर रहे हैं पर उनकी नहीं सुनी जा रही। मानसून सिर पर है। अब इस गांव के 165 परिवार चिंता में हैं कि नाले में उफान के साथ वह तीन महीने के लिए फिर बाहरी दुनिया से कट जाएंगे। पखनचूहा पंचायत के कानकीपारा के 120 परिवार व पटेलपारा के 45 परिवार नाले की बाढ़ में हर साल फंसते हैं। अति आवश्यक स्थिति में यह लोग लकड़ी की दो बल्लियों से अस्थाई पुल बनाते हैं और जान जोखिम में डाल नाला पार करते हैं।

कटेकल्याण ब्लाक का पखनचूहा पंचायत कुछ साल पहले तक बड़े गुडरा पंचायत में था, तभी से ग्रामीण नाले पर पुल की मांग करते आ रहे हैं। अब नवीन पंचायत बनने के बाद भी पखनचूहा में पुलिया की मांग की जा रही है पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। यहां के दो मोहल्ले कानकीपारा व पटेलपारा के लोग बरसात में पहुंचविहीन हो जाते हैं। कानकीपारा में 120 परिवार व पटेलपरा में 45 परिवार रहते हैं।

राज्य में सरकारें और मुख्यमंत्री बदलते रहे, मगर समस्या नहीं बदली। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश में बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बना रहता है। स्कूल, आंगनबाड़ी सब बंद हो जाते हैं। नाले के पार ही स्कूल है। आंगनबाड़ी और सरकारी राशन की दुकान भी नाले के उस पार है। गांव में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। प्रशासन यह कहकर यहां पुलिया बनाने से बच रहा है कि यह इलाका नक्सल प्रभावित है। हालांकि बड़े गुडरा में फोर्स का कैंप खुलने के बाद यहां नक्सल घटना नहीं हो रही है।

जानिए क्‍या बोल रहे सीईओ

'पखनचूहा नाले पर पुलिया की स्वीकृति नहीं मिली है। जल्द ही प्रस्ताव भेजकर पुलिया की स्वीकृति लेंगे।'

-गौतम गाहिर, सीईओ, जनपद पंचायत कटेकल्याण।

Posted By: Nai Dunia News Network

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