सुकमा। आज रविवार को कुकानार परगना के ग्राम कातलमिरी में गादी दियारी त्योहार मानाया जा रहा है। यह आदिवासियों का पारंपरिक त्योहार है जो आदिकाल व पुरखों के रीति नियम को बरकरार रखते तथा हर वर्ष पौष माह में खेत-खलिहान का काम पूरा कर मनाया जाता है।

स्थानीय फसल धान, कोदो, कोसरा, मूंग राहर जैसे अन्य अनाज जिसका उत्पादन लिया जाता है। उसे एकत्र कर घरों के अंदर रखते हैं। उसके बाद गांव के पुजारी द्वारा सेवा अर्जी कर देवताओं को भोग देकर प्राकृतिक देवताओं से आशीर्वाद मांगा जाता है। ये एक परंपरा हैं जो प्रकृति से जुड़ा नियम है। पूजा अर्चना के बाद घर से अनाज लाकर सभी ग्रामीण मिल बांटकर खाते है तथा नया धान का लांदा (मादक पेय) बनाकर दिया जाता है।

गांव के पटेल देवा मरकाम ने कहा है कि ये त्योहार आदिवासियों के पुरखों का त्योहार है जो हमारे पूर्वजों द्वारा प्रकृति से जुड़े देवताओ को प्रसन्न करने अनंतकाल से मनाया जाता रहा है। पुरखों द्वारा निर्धारित परंपरा का हमें पालन करना है और ये हमारी जिम्मेदारी भी है।

पुजारी हिड़मा राम कुंजाम ने बताया कि कि साल भर का मेहनत के बाद सारा धान घरो में जमा कर एक साथ गाव के सभी ग्रामीण अपनी थकान व पीड़ा को भुलाकर खुशियां लाने के लिए प्राकृतिक देवता से सेवा अर्जी कर नर नारी, धन माल, पशु पक्षी को खुशहाल रखने के लिए आशीर्वाद मांगते है और खेत खलिहान मरहानों में मरम्मत, खरपतवारों की सफाई जड़ी बुटी को काटने के लिए जागा देवता के द्वार पर छोटे-छोटे पौधे को काट कर अनुमति दी जाती है। दूसरे दिन चावल का लांदा एक जगह जमा कर मिलकर साथ में पीकर नाचगान किया जाता है, जिसे ऋभीमुल लांदा कहा जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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