दंतेवाड़ा। देश में तीन अप्रैल तक नक्सलियों की सबसे अधिक मौतें दंडकारण्य इलाके में हुई हैं। नक्सलियों ने पांच अप्रैल को जारी पर्चे में यह बात स्वीकार की है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी के दक्षिण सब जोनल ब्यूरो ने पांच अप्रैल को जारी पर्चे में कहा है कि पहली जनवरी से तीन अप्रैल तक देश में 28 नक्सली मारे गए। इनमें दो मप्र, सात झारखंड, एक ओडिशा, 17 दंडकारण्य और एक तेलंगाना में मारे गए। पीपुल्स लोकल गुरिल्ला आर्मी यानि पीएलजीए मुहिम चला रही है।

पर्चे के अनुसार इन राज्यों के पश्चिम सिंहभूम, बोकारो, लोहरदग्गा, बीजापुर, नारायणपुर, गढ़चिरौली, मलकानगिरी और कांकेर में लड़ाइयां हुई हैं। माओवादियों की सेंट्रल कमेटी ने सरकार पर दमन का आरोप लगाते 26 अप्रैल को बंद का आह्वान किया है। नक्सली प्रवक्ता ने ये आशंका जताई है कि तर्रेम-सिलगेर मुठभेड़ के बाद सरकार हमले की तीव्रता बढ़ा सकती है, जिसके लिए संगठन को तैयार किया जा रहा है।

यह पहला मौका नहीं है जब भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी ने अपने नुकसान और भावी रण्ानीति की चर्चा पर्चे जारी कर की है। इससे पहले भी सुरक्षा बलों के साथ हुए मुठभेड़ में नक्सलियों के जानमाल के नुकसान की जानकारी दी है। कई पर्चे में तक सरकार को किसी सश्ाक्त मध्यस्थ के माध्यम से बिना किसी श्ार्त के बात करने का सुझाव तक दिया गया है। ऐसे पर्चे पर बात करने के लिए नक्सलियों की तरफ से कोई आगे आएगा, ऐसे पर्चों पर कभी स्पष्ट नहीं किया गया। कई बार इनके पर्चे में बस्तर के आदिवासी युवाओं को नक्सलवाद से जुड़ने की अपील भी की जाती है। ज्यादातर पर्चें पर भारत बंद का आह्वान किया जाता है।

Posted By: Ravindra Thengdi

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