दंतेवाड़ा। Dussehra 2022: पंचमी तिथि को दर्शन के लिए दंतेश्वरी माता के दरबार में लंबी लाइन लगी है। सुबह तीन बजे से हजारों की संख्या में दर्शनार्थी करीब आधा किलोमीटर लंबी लाइन में लगे हुए हैं। इधर, बस्तर दशहरा का आमंत्रण देने बस्तर राजा कमलचंद भंज देव दंतेवाड़ा पहुंचेंगे। इस दौरान मंदिर पहुंचकर मां के दर्शन-पूजन कर मां को दशहरा में आने निमंत्रण देंगे। बस्तर दशहरा के लिए राज परिवार माईजी को आमंत्रण देने के लिए हर वर्ष अश्वनी शुक्लज पंचमी राज परिवार के सदस्य मांझी चालाकियों का दल जगदलपुर से दंतेवाड़ा माईजी को आमंत्रण देने आते हैं।

संस्कृत में लिखी होती है विनय पत्रिका, जिसे राज गुरु लिखते हैं

विनय पत्रिका संस्कृत में राज गुरु लिखते हैं। विनय पत्रिका अक्षत, सुपारी सहित दंतेश्वरी माई के चरणों में अर्पित की जाती है। देवी से दशहरा में सम्मलित होने माईजी से विनंती की जाती है। न्यौता स्वीकार करने के बाद देवी प्रतीक मावली माता की प्रतिमा, जो नए कपड़ों में हल्दी लेप लगाकर बनाई जाती है। मावली देवी की पूजा-अर्चना कर डोली में विराजित की जाती है। दंतेश्वरी देवी का नाम मावली देवी भी है, डोली को गर्भगृह से बाहर मंदिर के सभा कक्ष में रखा जाता है।

वाहनों से डोली जाती है जगदलपुर

इसके बाद पंचमी से अष्टमी तक डोली सभा कक्ष में स्थापित रहती है। अष्टमी को देवी दंतेश्वरी पुजारी व सेवादारों के साथ जगदलपुर दशहरा देखने को रवाना होती हैं। माईजी की डोली की रवानगी से पहले दी जाती है सलामी, रियासत काल में माईजी की डोली को दंतेवाड़ा से जगदलपुर पहुंचने में तीन से चार दिन लगते थे। जब वाहनों से डोली जगदलपुर के लिए जाती है तो दंतेवाड़ा से जगदलपुर तक गीदम, हाराम, अवरभांठा, बास्तानार, किलेपाल, कोडेनार, डिलमिली, तोकापाल सभी जगह माई जी का स्वागत किया जाता है।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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