अनिल मिश्रा, जगदलपुर। दंतेवाड़ा उपचुनाव में शहादत की जंग में सरकार का दम भारी पड़ा। महज छह महीने पहले जिस श्यामगिरी गांव के पास नक्सलियों ने भाजपा विधायक भीमा मंडावी की बारूदी विस्फोट में हत्या की थी, वहां भी उनकी पत्नी ओजस्वी मंडावी को सहानुभूति के मत नहीं मिले। इस बेल्ट में कांग्रेस के मुकाबले आधे वोट भी भाजपा के हिस्से नहीं आए।

ओजस्वी ने श्यामगिरी की माटी को माथे पर लगाकर चुनाव प्रचार शुरू किया था। हालांकि कांग्रेस इस बात को लेकर हमेशा सतर्क रही कि यहां शहादत मुद्दा न बनने पाए मगर जब शहादत की बात आती तो कांग्रेस देवती कर्मा के पति महेंद्र कर्मा की शहादत को सामने रखती भी नजर आई। भीमा की मौत को अभी करीब आठ महीने ही हुए हैं। कांग्रेस को डर तो था ही कि शहादत पर चुनाव न हो जाए।

कांग्रेस-भाजपा ने खेला भावनात्मक कार्ड

कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा, दिवंगत भाजपा विधायक भीमा मंडावी के गांव गदापाल पहुंच गईं थी। भीमा के मां-बाप के सामने रोईं और कहा-मैंने भी अपना पति खोया है। अपनों की शहादत का दर्द जानती हूं। गेंद कांग्रेस के पाले में जाती दिखी तो भाजपा की ओजस्वी मंडावी अगले ही दिन कर्मा के गांव फरसपाल पहुंच गईं।

महेंद्र कर्मा की प्रतिमा पर फूल चढ़ाया। इन चुनावों में शहादत के अलावा सरकार भी मुद्दा थी। कर्मा परिवार को लेकर जहां भी असंतोष दिखा वहां कांग्रेसियों ने सरकार के नाम पर वोट मांगा। नतीजों से पहले ही यह दावे किए जाने लगे थे कि वोट सरकार के पक्ष में ही पड़े हैं।

नक्सलवाद नहीं था मुद्दा

नक्सलगढ़ के चुनाव में नक्सलवाद मुद्दा नहीं था। पहली बार यह भी हुआ कि चुनाव में नक्सली हिंसा नहीं दिखी। यह भी चर्चा थी कि कांग्रेस अंदरूनी इलाकों तक जा पाई जबकि भाजपा का प्रचार शहरी और कस्बाई इलाकों तक ही सीमित रहा।

हर जगह कांग्रेस आगे

शहर हो या गांव सभी जगह कांग्रेस को बढ़त मिली। पांच नगरीय निकायों में कांग्रेस सिर्फ दंतेवाड़ा में पिछड़ी। यहां नगर पालिका अध्यक्ष देवती के पुत्र दीपक कर्मा हैं।

पहले से थी तैयारी

उपचुनाव की तैयारी कांग्रेस पहले से ही कर रही थी। राज्य में सरकार बनाने के बाद पहली बार हो रहा चुनाव सरकार के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव था। बैलाडीला में अडानी को खदान देने का आदिवासियों ने विरोध किया तो सरकार ने सुर में सुर मिलाया। टाटा के लिए दी गई जमीन की वापसी हो या जेल में बन्द आदिवासियों की रिहाई का मसला, उन्हें लुभाने के तमाम उपाय किए गए।

Posted By: Sandeep Chourey

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