दंतेवाड़ा। नईदुनिया प्रतिनिधि

उपचुनाव मतदान के लिए अब दो सप्ताह से भी कम समय बचा है। ऐसे में राजनीतिक दल प्रचार और जनसंपर्क में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। कांग्रेस जिले के सभी गांव तक अपनी पैठ बनाने सांसद- विधायकों को भेज रही है। कांग्रेस ने एक दौर का कार्यक्रम पूरा कर लिया है। भाजपा ने भी प्रदेश पदाधिकारी और पूर्व मंत्री विधायकों को बुलाया है। हालांकि सत्ता में होने से कांग्रेस में भाजपा की तुलना में ज्यादा संसाधन और प्रचारक दिख रहे हैं। भाजपा के पूर्व मंत्री- विधायक गीदम में ही अपनी उपस्थति दर्ज करा पाए हैं। जिले के अन्य ब्लॉक और भीतरी गांवों तक भाजपा नेताओं की पहुंच कम नजर आ रही है। भाजपा में अंदरूनी इलाकों में कमान अब तक स्थानीय नेताओं के ही जिम्मे है। जबकि कांग्रेस के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अपनी पकड़ गांव तक बनाने में जुटी है। बुधवार को भाजपा प्रत्याशी ओजस्वी मंडावी ने कुआकोंडा इलाके में दौरा किया तो कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा ने साप्ताहिक बाजार दंतेवाड़ा में पहुंच वोट मांगा है। जबकि भाकपा प्रत्याशी भीमसेन मंडावी ने किरंदुल में लोगों के बीच पहुंच वोट अपील की है। बुधवार को कांग्रेस के नेताओं ने पूरे जिले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराया। इस बीच भाकपा ने भी ग्राम धुरली में ग्रामीणों की सभा ली। जिसमें सुकमा के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम शामिल हुए व पार्टी प्रत्याशी भीमसेन के लिए वोट मांगा।

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जनसंपर्क में सुरक्षा का सवाल

उपचुनाव में राजनीतिक दलों के प्रचार और जनसंपर्क में सुरक्षा रोड़ा पैदा कर रहा है। संवेदनशील इलाका होने से पुलिस फूंक- फूंक कर कदम रख रही है। कांग्रेस के महेंद्र कर्मा हों या भाजपा के भीमा मंडावी दोनों की मौत नक्सली हमले में हुई है। इसके अलावा जिले के कई नेताओं पर नक्सली अटैक हो चुके हैं। प्रत्याशी और पार्टी पदाधिकारियों को दौरे के दौरान पूरी सुरक्षा दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि सभा और जनसंपर्क की सूचना पहले दें और पहले सुरक्षा पाएं। अन्यथा अपनी जिम्मेदारी पर प्रचार के लिए निकलें। नेताओं के दौरे से पहले फोर्स रोड ओपनिंग से लेकर इलाके का जायजा लेने तक सतर्कता बरत रही है। बड़ी संख्या में जवानों को क्षेत्र में तैनात किया जाता है। इसके बाद प्रत्याशी और समर्थक उस इलाके में जा रहे हैं।

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वोटर तो हैं पर संपर्क नहीं

स्थानीय नेताओं का अपने क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। वे अच्छे- खासे वोटर होने का दावा भी कर रहे हैं लेकिन वोटरों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। एक नेता ने कहा कि मेरा वोट कोई प्रभावित नहीं कर सकता लेकिन चुनावी माहौल में संपर्क बनाए रखना जरूरी है। अब फोर्स की हिदायत और खुद की सुरक्षा के मद्देनजर गांव तक पहुंचना आसान नहीं है।

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