दंतेवाड़ा। नईदुनिया प्रतिनिधि

दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा, सुकमा और बस्तर जिले में फैला नक्सलियों का दरभा डिवीजन अब कमजोर हो गया है। शासन-प्रशासन की नीतियों से आम जनता प्रभावित हुई हैं। उसका उन्हें लाभ मिल रहा है। यही वजह है कि नक्सली मुठभेड़ में मारे जा रहे, पकड़े जा रहे हैं और पुलिस के मुखबिर बन रहे हैं। इस साल नक्सली संगठन में नई भर्ती भी बहुत कम हुई हैं। यह खुलासा नक्सलियों के पत्र से ही हुआ है। 8 नवंबर को कटेकल्याण इलाके में हुए मुठभेड़ में वर्दीधारी नक्सली कमांडर देवा मारा गया गया था। शव के साथ बरामद 9 पत्रों में इस बात का जिक्र है। जिसे देवा ने आंध्र-ओडिशा बार्डर कमेटी के सेक्रेटरी साकेश के नाम लिखा था। अधिकारियों का कहना है कि अन्य नक्सल सामग्रियों के साथ ओडिया व गोंडी में लिखे 9 पत्र मिले हैं। इन पत्रों में नक्सली खुद को कमजोर बताते चिंतित हैं। हताश हो चुके नक्सलियों ने पत्र में लिखा है कि शासन-प्रशासन की नीतियों का असर इलाके में दिख रहा है। पुलिस के काम करने का तरीका पहले जैसा नहीं रहा और ग्रामीण भी पहले जैसे नहीं रहे। वे सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के साथ नक्सलियों से दूरी बना रहे हैं। फोर्स के सोर्सेस बढ़े हैं और नक्सलियों के मुखबिर कमजोर हो रहे हैं। कई नक्सली साथी मुठभेड़ में मारे या पकड़े जा रहे है। आत्मसमर्पण कर वे लोग सरकार की नीतियों का लाभ भी ले रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पत्र से स्पष्ट है कि नक्सलियों का दरभा डिवीजन कमजोर हो गया है। इनके पास लड़ाकों और हथियारों की कमी पड़ गई है। ज्ञात हो इसी दरभा डिवीजन के तहत जिले में सक्रिय कटेकल्याण और मलांगिर एरिया कमेटी है। जिसके कई बड़े लीडर मुठभेड़ में मारे गए और कुछ ने समर्पण कर दिया है।

मजबूत रहा है दरभा डिवीजन

नक्सलियों के बस्तर में तैनात कमेटियों में दरभा डिवीजन को मजबूत माना जाता है। दरभा डिवीजन ने बड़ी वारदातों की जिम्मेदारी ली है और यहां के नक्सलियों के नाम एनआइए के लिस्ट में हैं। झीरम कांड, ताड़मेटला, श्यामगिरी हो या किरंदुल के बड़े वारदात सभी में दरभा डिवीजन और उसकी कमेटियों का हाथ रहा है। यह डिवीजन फोर्स के लिए भी सिरदर्द रहा है।

'नक्सलियों का दरभा डिवीजन वेल्टिनेटर पर है। जनता उन्हें समझ चुकी है और दूरी बना रही है। इस बात के सबूत उनके पत्र हैं। जिसे देवा ने आंध्र-ओडिशा बार्डर कमेटी के सचिव साकेश के नाम लिखा था। 9 पन्ने का पत्र गोंडी बोली में है, जिसका हिंदी अनुवाद कराया गया जिसमें नक्सलियों की चिंता स्पष्ट दिख रही है। साथ ही कुछ दिन नक्सलियों के बातचीत का फोन टेप में भी उनका लीडर उन्हें कटेकल्याण और मलांगिर एरिया से निकलकर सुरक्षति जगहों पर जाने की हिदायत दे रहा है। अन्यथा मारे फोर्स की गोली से मारे जाने का अंदेश का जिक्र है।'

-डॉ. अभिषेक पल्लव, एसपी दंतेवाड़ा

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Posted By: Nai Dunia News Network