दंतेवाड़ा। Dantewada News छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में एक बस्ती है जुडूम पारा। इसे एसपीओ (विशेष पुलिस अधिकारी) बस्ती भी कहते हैं। यहां वह आदिवासी रहते हैं जो सलवा जुडूम (नक्सलियों के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन) शुरू होने से पहले नक्सली हिंसा की वजह से बेघर हुए थे। इंद्रावती नदी पार के एक गांव के सरपंच और उनके रिश्तेदार 2005 में रातों-रात भागकर यहां आए थे। नक्सलियों ने सरपंच पर प्राणघातक हमला किया था। तब से ये 11 परिवार वापस नहीं लौट पाए हैं। इस घटना के बाद सलवा जुडूम शुरू हुआ तो सबसे पहले यही लोग सामने आए थे। गांव में उनके कई एकड़ खेत हैं। यहां एक कमरे में रहने को मजबूर हैं। इस बस्ती के हर घर में एसपीओ है।

सलवा जुड़ूम शुरू हुआ तो गांवों से पलायन कर आए युवाओं को बंदूक चलाने का तीन माह का प्रशिक्षण देकर विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के तौर पर भर्ती कर लिया गया। तब इस एसपीओ बस्ती में 11 परिवारों में 22 एसपीओ थे। जुड़ूम पर सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगाया तो सरकार ने एसपीओ को सहायक आरक्षक के तौर पर पुलिस में भर्ती कर लिया। हालांकि यहां के चार एसपीओ ही सहायक आरक्षक बन पाए हैं, बाकी 18 नगर सेना में हैं और सरकारी अफसरों के बंगलों में तैनात हैं।

नक्सलियों ने घोंप दी गुप्ती तब भागे

इंद्रावती नदी पार बंगोली पंचायत के सरपंच रहे सुदरूराम इच्छाम बताते हैं कि गांव के विकास की बात की तो एक रात नक्सली नेता राजमन ने सोते वक्त घर में घुसकर उसके सीने में गुप्ती घोंप दी थी। यह वर्ष 2004 की घटना थी। पत्नी सुकारी ने कुल्हाड़ी लेकर नक्सलियों को दौड़ाया। रात के अंधेरे में घने जंगलों से होते हुए सुदरू और परिवार के अन्य लोग इंद्रावती के तट तक आए। वह घायल अवस्था में ही डोंगी के सहारे वह सबको निकाल लाया। सुदरू के पिता मुराराम की उम्र 102 साल है। वह कहते हैं 50 एकड़ जमीन, दर्जनों पशु, बाग सब छूट गया। आज मजदूरी करके जीवन चला रहे हैं। कुछ पूर्व एसपीओ रामचंद बारसा, सोनकू भास्कर, रामनाथ पोयाम दुखी मन से बताते हैं कि गांव के साथ रिश्तेदारी भी छूट गई। नक्सल दहशत की वजह से न हम वहां जा पाते हैं न नदी उस पार से कोई यहां आ पाता है।

ग्रामीणों को मारते रहे नक्सली

एसपीओ कैंप के पंडरूराम कहते हैं कि वर्ष 2001 में नक्सलियों ने गांव में उसके दोस्त बुराम की हत्या कर दी थी। 2004 में धारदार हथियार से नक्सलियों ने उनके पिता पर हमला किया तो वह गांव से भाग आया। नक्सलियों ने उसके एक अन्य दोस्त रामाराम की हत्या 2009 में छिंदनार बाजार में की।

Posted By: Nai Dunia News Network