नईदुनिया (दंतेवाड़ा)। दंतेवाड़ा के टिकनपाल में एक अगस्त को वन कर्मियों के साथ कि गई थी मारपीट,इस मामले में अब किरन्दुल पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है,जिसमे पोदीया,भीमा,जोगा को मुख्य आरोपी बनाया गया है,वन विभाग के द्वारा जिन तीन लोगो को गिरफ्तार किया गया है,इनके साथ तीन और अन्य के नाम से रिपोर्ट दर्ज की गई थी।वंही तीनो ग्रामीणों के गिरफ्तारी के विरोध में 50 से अधिक टिकनपाल के ग्रामीण भी थाना पहुंचे थे।

किरन्दुल थाना के इस मामले के जांच अधिकारी एएसआई रेवा राम साहू ने बताया वन कर्मियों के द्वारा नाम जद तीन लोगों के नाम ही मारपीट की शिकायत की गई थी,तीन लोगो को ही गिरफ्तार किया गया है।

दोनों घायल वन कर्मियों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

इससे पहले भी टिकनपाल में वन विभाग टीम के द्वारा भी कई बार अवैध लकड़ी कारोबारियों पर कार्यवाही की गई थी,जिस आरोपी की अभी गिरफ्तारी हुई है वन कर्मियों से मारपीट मामले में उस की पिकअप वाहन लकड़ी से भरी पकड़ी गई थी,टिकनपाल, चोलनार मे वन विभाग द्वारा लगातार लकड़ी का अवैध कारोबार करने वालो पर शिकंजा कसा जा रहा था,जिसके बाद एक अगस्त को टिकनपाल पहुंची टीम पर हमला हुआ।

ये कहना है टिकनपाल के ग्रामीणों का

दिन सोमवार समय लगभग सुबह 11 बजे के आस पास ग्राम पंचायत टीकनपाल में डोंगरीपारा मुन्द्रपारा, गायतापारा, भट्टीपारा पटेलपारा में नकाबपोश में तीन से चार अनजान व्यक्तियों के द्वारा लिंगा,मोटू,भीम्ख, हुगा आदि ग्रामीणों के घरों में जबरन महिलाओं को डरा धमका कर घर की तलाशी लेने के उपरांत कौन हो कहा से हो महिलाओं के द्वारा पूछने पर भी अपना परिचय न बताते हुए घरो की तलाशी ले रहे थे।

तभी अचानक पटेलपारा में पुरे ग्रामीणों के द्वारा गांव पर पूजा-पाठ किया जा रहा था अचानक एक महिला दौड़ते हुए गांव वालो को जाकर बताई की कोई अनजान व्यक्ति नकाबपोश में आकर घर में घुस रहा है तभी ग्रामीण पूजा स्थल से उठकर उन लोगो के पास गए और ग्रामीण लोगों के द्वारा कौन हो पूछने पर यंहा वहां भागने की कोशिश करने लगे उसमें से तीन लोग भाग गये तभी ग्रामीणों ने दो लोगों को शक के दायरे में आकर धक्का मुक्की किया गया ग्रामीणों को तब तक भी वन विभाग के कर्मचारी होने की जानकारी ना ही स्वयं सही जानकारी नहीं दिए उनके साथ धक्का-मुक्की होने के बाद तभी अचानक पटेलपारा पंचायत भवन में वन विभाग की वन उड़नदस्ता की टीम पंचायत में थी तभी उनके द्वारा पता चला की वो वन विभाग के कर्मचारी है जो की वन विभाग की उड़नदस्ता की टीम वन विभाग की ड्रेस में थी जो लोग गांव के पारा-पारा में तलाशी ले रहे थे तभी शक के आधार पर ग्रामीणों के द्वारा धक्का-मुक्की किया गया

जिस तरह से ग्रामीणों पर वन विभाग के द्वारा FIR कर वन माफियों के द्वारा हमला करने की बात मीडिया के दद्वारा प्रचार प्रसार कर ग्रामीणों पर जो आरोप लगाया जा रहा है वो सरासर गलत है गाओं के ग्रामीण आदिवासियों के द्वारा जल जंगल जमीन की रक्षा करते हुए आ रहे हैं और आगे भी जंगल की रक्षा करेगे टिकनपाल के किसी ओ ग्रामीण छेत्र में वन विभाग के द्वारा एक पौधा भी नहीं लगाया गया है।

एनमसीसी और मित्तल कंपनी के द्वारा पौधा रोपण की रॉयल्टी वन विभाग को दिया जाता है वन विभाग बताए की एनमडीसी माइनिग के दौरान लाखो-करोडो वृक्षकट दिए गए है ,उसके बदले में पौधा रोपण किया है आज दिनांक तक केवल बैलाडीला पहाड़ी छेत्र मे एनडीसी के कारण पर्यावरण वायु प्रदूषण होता दिख रहा है वन विभाग वन भूमि होने के नाम से कोमनियों को बेचने का काम कर रही है और कोई भी पौधा रोपण वन विभाग के द्वारा कहीं पर भी दिखाई नहीं देता है जिसका हम सभी ग्रामवासी विरोध करते हैं।

ग्रामीणों ने दिया पांचवी अनसूचि क्षेत्र का हवाला

पूरा बस्तर छेत्र संविधान के अनुछेद 244(1) के तहत पांचवी अनुसूचित छेत्र है और पेशा कानून लागु है बिना ग्राम सभा के अनुमति से सरकार की कोई भी काम नहीं किया जा सकता है वन विभाग अपनी मनमानी गांव के अंदर मैं जाकर गाओ के जन प्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों को विश्वास में न लेते हुए कुछ भी करने की कोशिश कर रहा है। गावो में बिना ग्राम सभा के अनुमती के बिना जिस तरह से वन विभाग गावों में काम कर रही है जो की गैरकानूनी है जिसका हम सभी ग्रामवासी विरोध करते हैं वन विभाग बिना ग्राम सभा की अनुमति के कोई भी काम न करें

Posted By: Pramod Sahu

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