रायपुर। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले को गरीबी से बाहर निकालने के लिए सरकार वहां हर सेक्टर में रोजगार की संभावना तलाश रही है। इसके तहत गोठान से लेकर महिला स्व-सहायता समूहों के आर्थिक विकास की रणनीति बनाई जा रही है। इसको लेकर मुख्य सचिव आरपी मंडल ने मंगलवार को मंत्रालय में आला अफसरों की बैठक ली। सीएस ने दंतेवाड़ा जिले के विकास के लिए विशेष कार्ययोजना के तहत संवेदनशीलता से काम करने का निर्देश दिया है।

बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दंतेवाड़ा में बीपीएल की दर चार वर्ष में 60 से घटाकर 20 फीसद करने का लक्ष्य रखा है। मंडल ने कहा है कि जिले के सभी लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए अधिकारी प्रतिवर्ष लक्ष्य बनाकर काम करें। इसके लिए आर्थिक गतिविधियों का निर्धारण कर लोगों की स्थीय आय वृद्धि की गतिविधियों का निर्धारण सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में एसीएस अमिताभ जैन, प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, डॉ. मनिन्दर कौर द्विवेदी, मनोज पिंगुआ, सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, निहारिका बारिक, डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इन उपायों के जरिये तलाशी जा रही आर्थिक समृद्धि

मुख्य सचिव ने जिले की स्व सहायता समूहों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उनके द्वारा तैयार सामग्री का उपयोग छात्रावासों, आश्रमों एवं पुलिस कैम्प में करने की राय दी। इसी तरह से सुपोषण अभियान के तहत गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को गरम भोजन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। मुख्य सचिव ने जिले के गोठानों को आजीविका केंद्रों में परिवर्तित कर वहां पर रोजगार परख कार्य कराने के निर्देश दिए हैं। वनाधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त पट्टाधारकों के लिए हितग्राही मूलक योजना बनाकर लाभान्वित करने के निर्देश दिए हंै।

खेती को लाभ का काम बनाने पर जोर

जिले के किसानों के खेतों में लघु व सूक्ष्म सिंचाई योजना बनाकर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए समुचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने कृषि, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को दंतेवाड़ा जिला का दौरा कर विभागीय कार्यो को मौके पर जाकर देखने के निर्देश दिये है। उन्होंने जिले के प्रभारी सचिव कमलप्रीत सिंह को सभी विभागों से समन्वय बनाकर कार्ययोजना के तहत कार्य करने के निर्देश भी दिए।

Posted By: Sandeep Chourey