नईदुनिया (दंतेवाड़ा)। दंतेवाड़ा से 15 वर्ष की एक बच्ची को भगाकर उज्जैन ले जाया गया। वहां एक महिला को उसे 15 हजार रुपये में बेच दिया गया। महिला ने इस बच्ची का विवाह करवा दिया। बच्ची को मिल रही प्रताड़ना की जानकारी मिलने पर उज्जैन में पुलिस ने उसे थाने में रखा। पूछताछ में उसने अपना घर दंतेवाड़ा में होना बताया। उज्जैन पुलिस की सहायता से दंतेवाड़ा पुलिस उसे यहां लेकर आई। बच्ची को खरीदने वाली और उससे बलात् विवाह करने वाले आरोपितों को भी गिरफ्तार कर पुलिस अपने साथ लाई है।

दंतेवाड़ा एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्ची के गायब होने के बाद थाने में रिपोर्ट लिखी गई थी। बीते वर्ष 28 जून को पुलिस ने रिपोर्ट लिखी। जिस महिला ने बच्ची के गायब होने की जानकारी पुलिस को दी, उस महिला की अब मृत्यु हो चुकी है। एसपी ने बताया कि इस बीच मध्यप्रदेश के उज्जैन जिला के माकडोन थाने से दंतेवाड़ा जिले के बांगापाल थाने को बच्ची के संबंध में जानकारी दी गई। इस सूचना के बाद दंतेवाड़ा पुलिस उज्जैन गई। वहां पुलिस को रहस्यमयी जानकारी मिली।

वहां जाने पर दंतेवाड़ा पुलिस को पता चला कि बच्ची को दंतेवाड़ा से भगाने वाले ने उज्जैन में उसे किरण परमार उर्फ संध्या नामक महिला के पास 50 हजार रुपये में बेच दिया था। किरण ने जितेंद्र सिंह परिहार उर्फ कल्लू राजपूत से इस नाबालिग लड़की का विवाह करवा दिया। बच्ची को विवाह के बाद प्रताड़ना मिली। जिसकी शिकायत मिलने पर उज्जैन पुलिस ने जब कल्लू को पकड़ा तब ये रहस्य खुला। उज्जैन पुलिस ने दंतेवाड़ा पुलिस को सूचना दी। दंतेवाड़ा पुलिस ने बच्ची को अपने नियंत्रण में लेकर आरोपितों को गिरफ्तार किया। वहां से इन्हें रिमांड पर दंतेवाड़ा लाया गया। कोर्ट में प्रस्तुत करने के बाद ये दोनों आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं। एसपी का कहना है कि दंतेवाड़ा में बच्ची की खरीदी-बिक्री की ये पहली घटना है। इस घटना की जांच की जा रही है। इसके और भी तथ्य हैं, जिन्हें विवेचना की परिधि में रखा गया है।

क्या कर रही थी पुलिस...?

साल भर पहले बच्ची के गायब होने की जानकारी पर दंतेवाड़ा पुलिस ने गुमशुदगी का अपराध दर्ज किया था। साल भर तक पुलिस केवल अपराध दर्ज करके बैठी रही। बच्ची को ढूंढने का कोई भी प्रयास दंतेवाड़ा पुलिस के द्वारा नहीं किया गया। जिस सफलता की बात कही जा रही है, वो भी उज्जैन पुलिस की ओर से मिली। बच्चों के अपहरण और गुमशुदगी को लेकर छत्तीसगढ़ के डीजीपी पुलिस को कई बार निर्देश दे चुके हैं कि ऐसे प्रकरणों की जांच में गंभीरता दिखाई जाए, पर इस प्रकरण में दंतेवाड़ा पुलिस की लचर कार्यशैली ही सामने आई। एसपी का कहना है कि बच्ची को भगाकर उसे बेचने का ये पहली घटना है। लोगों ने कहा कि इस घटना के सामने आने के बाद दंतेवाड़ा पुलिस को बच्चों की गुमशुदगी की पुरानी घटनाओं की विवेचना गंभीरता पूर्वक करनी चाहिए।

Posted By: Abhishek Rai

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