दंतेवाड़ा। ब्यूरो। दंतेवाड़ा के ढोलकल पहाड़ी पर विराजित 11वीं शताब्दी की गणेश प्रतिमा को अज्ञात लोगों ने करीब 50 फीट गहरी खाई में गिरा दिया। इससे प्रतिमा के 18 से 20 टुकड़े हो गए हैं। 26 जनवरी को दर्शन के लिए पहुंचे पर्यटकों की सूचना पर शुक्रवार को प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए प्रतिमा के टुकड़ों को उठाकर ऊपर लाया गया। इसमें करीब चार घंटे लगे। इसके बाद पुजारी की मौजूदगी में पूजा हुई और फिर दोबारा प्रतिमा के टुकड़ों को उतारकर करीब आठ किमी दूर फरसपाल गांव में रखा गया है।


पहाड़ी के करीबी गांव जामगुड़ा के ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने 25 जनवरी को शाम 5 बजे आखिरी बार प्रतिमा को देखी थी। प्रतिमा के खंडित होने से ग्रामीण व्यथित व दुखी हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक प्रतिमा को केमिकल ट्रीटमेंट कर और जोड़कर दोबारा पर्वत शिखर पर स्थापित किया जाएगा लेकिन इससे पहले फरसपाल के ग्रामीण और पुजारियों से चर्चा की जाएगी।

मौके पर पहुंचे कलेक्टर सौरभ कुमार और एसपी कमलोचन कश्यप ने कहा कि यह नक्सलियों की करतूत हो सकती है क्योंकि पर्यटन और पुरातत्व विभाग ने इस क्षेत्र को विकसित करने की मंशा बनाई है। दो करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी है। कलेक्टर ने बताया कि दंतेवाड़ा से करीब 12 किमी दूर फरसपाल और वहां से पहाड़ी के नीचे तक करीब डेढ़ किमी सड़क बनाई गई है।

गौरतलब है कि यह इलाका नक्सल प्रभावित है। पहाड़ पर लोगों की आवाजाही पर बंदिश-सी रहती है। बावजूद दर्शन के लिए लोग पहुंचते रहते हैं। पुलिस ने आशंका जताई है कि क्षेत्र में बाहरी लोगों की दखल न बढ़े इसलिए नक्सलियों ने प्रतिमा को खंडित करने के लिए नीचे फेंक दिया होगा।


प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने की जांच शुरू

ढोलकल की पहाड़ियों में पुरातात्विक महत्व की गणेश प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने के मामले की जांच शुरू हो गई है। पर्यटन और संस्कृति मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि पहाड़ी से गिरने पर प्रतिमा के लगभग आठ टुकड़े हो गए हैं। प्रथम दृष्टि में यह असामाजिक तत्वों की आपराधिक हरकत प्रतीत हो रही है। पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों सहित पुलिस ने भी तत्परता से मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बघेल ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रतिमा गिरने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार शर्मा और संचालक पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग आशुतोष मिश्रा स्थानीय अधिकारियों के साथ सम्पूर्ण तथ्यों का पता लगाएंगे।

फैक्ट फाइल

ढोलकल शिखर में गणेश

दूरी- दंतेवाड़ा से 22 किमी

वनकक्ष- फुलगट्टा 712

शिखर की ऊंचाई- 2596 फीट

मूर्ति की ऊंचाई- 3.6 फीट

मुद्रा- ललितासन

शिला- ब्लैक ग्रेनाइट

निर्माण काल- 11वीं शताब्दी

निर्माता- छिंदक नागवंशी

प्रतिमा को नदारद देख स्तब्ध रह गए युवक

शहर से लगे करकापाल के रवि नायडू ने बताया कि वे अपने मित्र मोहित चावड़ा, प्रतीक स्मिथ और संकेत नाथ के साथ 26 जनवरी की सुबह 10 बजे ढोलकल के लिए जगदलपुर से निकले थे। वे करीब एक बजे जामगुड़ा पहुंचे। मोटरसाइकिलें रख पैदल ढोलकल के लिए रवाना हुए। लगभग साढ़े तीन बजे जब वे शिखर पर पहुंचे और गणेश प्रतिमा को नदारद पाया तो स्तब्ध रह गए। उनके पीछे जामगुड़ा का एक लड़का भी आया था जो उनसे पहले ही लौट गया था।

वे साथियों के साथ करीब डेढ़ घंटे तक चट्टान के नीचे मूर्ति तलाशते रहे। निराश होकर जब गांव लौट रहे थे, तब अंधेरा घिरने से वे रास्ता भटक गए और सात बजे के बाद जामगुड़ा लौटकर ग्रामीणों को शिखर में प्रतिमा के न होने की जानकारी दी। यह खबर सुनते ही कई ग्रामीणों की आंखों में आंसू छलक उठे। ग्रामीणों ने ही रवि को बताया कि 25 जनवरी की शाम पांच बजे आखिरी बार उन्होंने गणेश प्रतिमा के दर्शन कर लौटे थे।

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