दंतेवाड़ा(ब्यूरो)। नक्सलियों द्वारा शनिवार को केतुलनार में बस उड़ाने की घटना में शहीद वनपाल बीपी शास्त्री का अंतिम संस्कार रविवार शाम डंकनी और शंकनी नदी के संगम पर कर दिया गया। शास्त्री की शहादत से आंवराभाठा बस्ती में मातम पसरा हुआ है। इधर बीपी शास्त्री के पार्थिव शरीर पर उनकी धर्मपत्नी जया शास्त्री ने परिजनों को रोने नहीं दिया। गम के आंसू को थामे हुए लगातार कहती रहीं कि- कोई रोए नहीं , ये शहीद हुए हैं।

इधर शास्त्री की शहादत के बाद वन कर्मियों में काफी आक्रोश है। इनका सवाल है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा यह आदेश है कि वन एवं पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रीय अमला को चुनाव से पृथक रखा जाए, बावजूद इसके वन कर्मियों की ड्यूटी मतदान में क्यों लगाई गई?

जिला कार्यालय के ठीक सामने आंवराभाठा निवासी बीपी शास्त्री (47) 1994 से वन विभाग में कार्यरत थे। वे बीजापुर जिला के भैरमगढ़ क्षेत्र में वनपाल के पद पर लगभग डेढ़ वर्ष से पदस्थ थे। मतदान कराने उनकी ड्यूटी कुटरू क्षेत्र में लगी थी। गुरूवार को मतदान निपटाने के बाद वे शनिवार को बेदरे, करकेली, फरसेगढ़ आदि मतदान केंद्रों के दलों के साथ राजस्थान बस में सवार होकर लौट रहे थे। तब नक्सलियों ने पूर्वान्ह 11 बजे केतुलनार के पास उनकी बस को उड़ा दिया था।

नक्सली हादसे में शहीद बीपी शास्त्री का पार्थिव शरीर रविवार सुबह दंतेवाड़ा के आंवराभाठा स्थित उनके निवास पर लाया गया। यह सूचना मिलते ही उनके निवास में दर्शनार्थियों का हूजूम उमड़ पड़ा। जो भी परिजन आता वह शहीद शास्त्री के पार्थिव शरीर को देख रो पड़ता था, लेकिन स्वयं को संभाले उनकी धर्मपत्नी जया शास्त्री यह कहकर उन्हें चुप करातीं रहीं कि वे शहीद हुए हैं, इसलिए कोई आंसू न बहाए। श्रीमती शास्त्री झोड़ियाबाड़म मिडिल स्कूल में शिक्षिका है।

शहीद बीपी शास्त्री के दो पुत्र हैं, आदित्य और अभिषेक । आदित्य चेन्नई में कोचिंग कर रहे हैं। शाम 5 बजे आदित्य के पहुंचने के बाद अंतिम यात्रा शुरू हुई। दुखी परिवार को ढहास बंधाने बस्तर वन वृत्त के सीएफ एमटी नंदी, जिलाधीश केसी देवसेनापति, वनमंडलाधिकारी वी विवेक रेड्डी, जिला वनोपज संघ के अध्यक्ष चैतराम अट्टामी, पूर्व विधायक भीमा मंडावी के अलावा जगदलपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिला के वनकर्मी बड़ी संख्या में पहुंचे थे।

अधिकारियों पर बिफरे वनकर्मी

एक तरफ जहां बीपी शास्त्री के घर में कोहराम मचा था, वहीं इनके घर के बाहर एकत्र दर्जनों वनकर्मी शासन -प्रशासन के अलावा अपने आला अधिकारियों के खिलाफ लगातार आक्रोश व्यक्त कर रहे थे। वनकर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष मो. सलीम का कहना है कि जब सामान्य प्रशासन विभाग ने यह निर्देशित किया है कि वन एवं पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रीय अमला को चुनाव कार्य से पृथक रखा जाए, इस के बावजूद वनकर्मियों को चुनाव ड्यूटी पर क्यों रखा गया।

आदेश की जानकारी विभाग आलाधिकारियों को भी थी। इन्होंने वनकर्मियों की पक्ष में कोई विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की। गुरूवार को मतदान निपटाने के बाद, दो दिन कुटरू में ठहरे मतदान दल के सदस्यों को हेलीकाप्टर से क्यों नहीं लाया गया। वनकर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा हेतु तैनात हेलीकाप्टर का उपयोग चुनाव आयोग के आब्जर्वर की सेवा में लगाया गया था, इसलिए मतदान दल के सदस्यों को उपरोक्त सुविधा नहीं मिल पाई। वन कर्मचारियों की मांग है कि नक्सली वारदात में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों के परिजनों को जो क्षतिपूर्ति राशि दी जाती है। उतनी ही राशि शहीद वनकर्मचारियों को भी मिलनी चाहिए।

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