Dussehra Invitation: दंतेवाड़ा। बस्तर दशहरा का आमंत्रण देने बस्तर राजा कमलचंद भंज देव दंतेवाड़ा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मंदिर पहुंचकर मां के दर्शन-पूजन कर मां को दशहरा में आने निमंत्रण दिया। बस्तर दशहरा के लिए राज परिवार माईजी को आमंत्रण देने के लिए हर वर्ष अश्वनी शुक्ल पंचमी राज परिवार के सदस्य मांझी चालाकियों का दल जगदलपुर से दंतेवाड़ा माईजी को आमंत्रण देने आते हैं।

विनय पत्रिका संस्कृत में राज गुरु लिखते हैं। विनय पत्रिका अक्षत, सुपारी सहित दंतेश्वरी माई के चरणों में अर्पित की जाती है। देवी से दशहरा में सम्मलित होने माईजी से विनंती की जाती है। न्यौता स्वीकार करने के बाद देवी प्रतीक मावली माता की प्रतिमा, जो नए कपड़ों में हल्दी लेप लगाकर बनाई जाती है। मावली देवी की पूजा-अर्चना कर डोली में विराजित की जाती है। दंतेश्वरी देवी का नाम मावली देवी भी है, डोली को गृभग्रह से बाहर मंदिर के सभा कक्ष में रखा जाता है।

वाहनों से डोली जाती है जगदलपुर

इसके बाद पंचमी से अष्टमी तक डोली सभा कक्ष में स्थापित रहती है। अष्टमी को देवी दंतेश्वरी पुजारी व सेवादारों के साथ जगदलपुर दशहरा देखने को रवाना होती हैं। माईजी की डोली की रवानगी से पहले दी जाती है सलामी, रियासत काल में माईजी की डोली को दंतेवाड़ा से जगदलपुर पहुंचने में तीन से चार दिन लगते थे। जब वाहनों से डोली जगदलपुर के लिए जाती है तो दंतेवाड़ा से जगदलपुर तक गीदम, हाराम, अवरभांठा, बास्तानार, किलेपाल, कोडेनार, डिलमिली, तोकापाल सभी जगह माई जी का स्वागत किया जाता है।

बस्तर की खुशहाली की कामना

दंतेवाड़ा पहुंचे बस्तर राजा कमलचंद भंजदेव ने बताया माईजी को दशहरा में आने का न्यौता दे बस्तर की खुशहाली की कामना भी की। बस्तर राजा ने भक्तों से मास्क अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने सहित मंदिर पहुंचने एवं लोगों से कोरोना का टीका लगवाने की अपील की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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