योगेंद्र ठाकुर, दंतेवाड़ा Father's Day 2020 नक्सली संगठन को छोड़ने के बाद ही छत्तीसगढ़ में बस्तर के कुछ युवाओं को पिता का सुख नसीब हो पाया है। दंतेवाड़ा जिले में बीते पांच साल में छह आत्मसमर्पित जोड़े मुख्यधारा से जुड़े हैं। नक्सली संगठन में रहने के दौरान इनकी नसबंदी करा दी गई थी। समर्पण के बाद पुलिस ने इनकी नसबंदी खुलवाई। इनमें से दंतेवाड़ा के कुछ दंपती अब औलाद का सुख पा रहे हैं। पिता बनने के अपने सुख को ऐसे ही आत्मसमर्पित कुछ नक्सलियों ने पितृ दिवस पर बयां किया।

जिंदगी अब जिंदगी सी लगती है

पुलिस लाइन में रहने वाले डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के जवान दिनेश कड़ती कहते हैं कि अब जीने का आनंद दोगुना हो गया। नक्सली संगठन में रहकर जिंदगी दूभर हो गई थी। जंगल पहाड़ में छिपते-छिपाते दूसरों को प्रताड़ित करना पड़ता था। अब खुलकर जी रहे हैं। दिनेश नक्सली संगठन में एलओएस डिप्टी कमांडर था। वहीं उसकी पत्नी मीना एरिया कमेटी मेंबर थी।

एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव की पहल पर दिनेश के साथ अन्य आत्मसमर्पित नक्सलियों की नसबंदी रायपुर के एक हॉस्पिटल में खुलवाई गई। छह माह पहले पिता बन दिनेश परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। एक अन्य समर्पित नक्सली योगेश मंडावी भी भावी संतान को लेकर खुश हैं।

विवाह की अनुमति दी, लेकिन करा दी नसबंदी

दिनेश बताते हैं कि जंगल में भटकने के दौरान मीना से प्यार पनपा। इसकी जानकारी नक्सली नेताओं को लगी तो पहले उन्हें अलग कर दिया। बाद में शादी की अनुमति देने से पहले महाराष्ट्र ले जाकर नसबंदी करा दी। वे कहते हैं कि विवाह के बाद भी हम दोनों साथ नहीं थे। अलग-अलग यूनिट में रखा गया था।

छह-सात माह में ही एक बार मुलाकात कराते थे। दिनेश के मुताबिक एसपी की पहल पर ही उसके साथ आत्मसमर्पण करके मुख्यधारा में शामिल हुए मंगू उर्फ पोदिया तेलाम और सन्नू कारम की भी नसबंदी खुलवाई गई।

बड़े नक्सली नेता नहीं कराते नसबंदी

अधिकारियों के मुताबिक नक्सली संगठन में विवाह की अनिवार्य शर्त है नसबंदी। आमतौर पर पुरुष नक्सलियों की नसबंदी कराई जाती है। ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें नक्सली संगठनों ने अविवाहित युवाओं की भी नसबंदी करा दी गई। अधिकारियों का मानना है कि नक्सली नेता नसबंदी नहीं कराते।

- पुलिस लगातार आत्मसमर्पितों की काउंसिलिंग कर रही है ताकि वे शर्म छोड़कर वैवाहिक जीवन में आने को तैयार हो पाएं। वे खुशहाल जिंदगी के साथ संतान सुख भी पा सकें, इसलिए उनका रिवर्स वसैक्टोमी ऑपरेशन (नसबंदी खुलवाना) कराया जा रहा है। दंतेवाड़ा जिले के छह आत्मसमर्पित नक्सलियों को इसका लाभ मिला है। -डॉ. अभिषेक पल्लव, एसपी, दंतेवाड़ा

Posted By: Sandeep Chourey

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