सुकमा। जैन समाज के संत आचार्य महाश्रमण का छत्तीसगढ़ में प्रवेश हुआ। जैन समाज समेत सर्व समाज के लोगों ने भी जैन मुनि का जोरदार स्वागत किया। संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कोंटा सीमा पर उनकी अगवानी की और जैन मुनि के साथ करीब पांच किमी चलकर फंदीगुड़ा पहुंचे। जैन मुनि द्वारा अहिंसा यात्रा की शुरूआत 09 नवंबर 2014 को दिल्ली के लाल किले से की गई है।

करीब 19 राज्य घूमने के बाद छत्तीसगढ़ पहुंचे इस यात्रा के माध्यम से जैन मुनि महाश्रमण सद्भावना, नैतिकता व अहिसा का संदेश दे रहे हैं। उनकी माने तो करीब एक करोड़ लोगों को नशा मुक्ति का संदेश दे चुके है। साथ ही जैन मुनि ने बस्तर में फैली अशांति को लेकर कहा कि अहिंसा के रास्ते चलकर शांति स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।

22-23 जनवरी को पहुंचेंगे जगदलपुर

तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण सोमवार को सुबह सात बजे कोंटा पहुंचे वे फंदीगुड़ा में रात्रि विश्राम करेंगे। वे सुकमा-दंतेवाड़ा-गीदम होते हुए 22-23 जनवरी को जगदलपुर की धरती को पावन करेंगे। तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण का पदार्पण बस्तर की धरती पर होगा। आपने हैदराबाद में चातुर्मास सम्पन्न कर वहां से एक दिसंबर को 39 संत व 16 साध्वियों के साथ विहार प्रारंभ किया व 14 फरवरी को मर्यादा महोत्सव रायपुर में सम्पन्न्र करेंगे तदोपरांत वहां से विहार कर आगामी चातुर्मास हेतु भीलवाड़ा राजस्थान के लिये प्रस्थान करेंगे।

मजबूरी के लिए हिंसा भी स्वीकार्य नहीं

ओसवाल जैन श्वेतांबर समाज जगदलपुर के सचिव प्रकाश बुरड़ ने बताया कि यह अहिंसा यात्रा भगवान महावीर के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने की है। इस यात्रा के तीन उद्देश्य हैं जिसमें अहिंसा, सद्भावना व नैतिकता प्रमुख है। यात्रा के दौरान जगह-जगह व्याख्यान भी दे रहे हैं। अहिंसा के रास्ते पर चलने का जोर दिया जा रहा है।

वहीं बस्तर के हालातों पर आचार्य ने कहा कि हिंसा किसी भी मजबूरी के लिए की जाए लेकिन वो स्वीकार्य नहीं है। इस समस्या का भी हल अहिंसा के रास्ते हल करने का प्रयास होना चाहिए। क्योंकि अहिंसा बहुत बड़ा हथियार है। उनके साथ जैन मुनियों का भी दल है जिसमें बच्चे व बड़े शामिल है।

तीन सूत्रों के आधार पर चलाएं जीवन- रेखचंद

संसदीय सचिव रेखचन्द जैन कोंटा पहुंचे और जैन मुनि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमारे 13 पंथी महासभा के प्रमुख आचार्य महाश्रमण का प्रदेश में स्वागत है। आचार्य के तीन सूत्र अहिंसा, सद्भावना व नैतिकता इन तीन सूत्र पर जीवन चलाए ताकि लोग शांति व प्रेम से जीवन यापन कर सके। आचार्य का आगमन जगदलपुर ही नही वरन पूरे बस्तर के लिये सौभाग्य की बात है, कोरोना की परिस्थितियां अनुकूल रही तो इस धरा पर धर्म की बड़ी प्रभावना होगी।सभी जाति धर्म के लोगों को इसका लाभ मिलेगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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