दंतेवाड़ा (ब्यूरो)। बारसूर क्षेत्र अंतर्गत इंद्रावती नदी के पार बसे गांवों पर नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए नक्सली ग्रामीणों की बैठकें ले रहे हैं। इसके अलावा मतदान के दिन ग्रामीण मतदान केन्द्रों तक पहुंचने से रोकने के लिए इलाके में नक्सलियों द्वारा नाकेबंदी की तैयारी भी है।

गौरतलब है कि गत विधानसभा चुनाव में भी नदी पार बसे गांवों में नक्सलियों ने मतदान बहिष्कार का फरमान जारी किया था। नक्सली व्यवधान को ध्यान में रखकर ही नदी पार के मतदान केन्द्रों को शिफ्ट करने की अनुमति निर्वाचन आयोग ने प्रदान की थी। उस समय नदी में जल स्तर अधिक होने से मतदाताओं के लिए नदी पार करना आसान नहीं था, लिहाजा उनकी सुविधा के लिए स्थानीय प्रशासन ने पांच नावें उपलब्ध कराई गई थीं लेकिन चुनाव के ठीक पहले नक्सलियों ने नावों को कौरगांव घाट में डुबो दिया था। इसके चलते कौरगांव में जीरो वोटिंग हुई थी।

लोकसभा चुनाव 10 अप्रैल को होना है। गर्मी बढ़ने से इंद्रावती नदी में पानी घुटने की ऊंचाई तक है। इस मौसम में ग्रामीण आसानी से नदी पार कर रहे हैं। ऐसे में नाव उपलब्ध न होने के बाद भी मतदान केन्द्रों तक पहुंच संभव है। नक्सली इस बात से पूरी तरह वाकिफ हैं, लिहाजा चुनाव बहिष्कार के उद्देश्य से नदी पार के गांवों में लगातार बैठकें ले रहे हैं, वहीं चुनाव के दौरान उनकी तैयारी नाकेबंदी की है, जिससे एक भी मतदाता गांव से बाहर न जा सके। बता दें कि गत विस चुनाव में कटेकल्याण, कुआकोण्डा व अरनपुर थाना क्षेत्र के कई अंदरूनी गांवों में नक्सलियों ने नाकेबंदी कर रखी थी। इसके चलते मूलेर, मेडपाल, ककाड़ी में एक-एक वोट पड़े थे जबकि किडरीरास, अलनार, पुरंगेल में लगभग शून्य मतदान हुआ था।

सोनी सोढ़ी को सहयोग नहीं

जिस सोनी सोढ़ी को नक्‍सलियों का सहयोग करने के आरोप में जेल में रहना पड़ता था उसकी को नक्‍सलियों ने लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की मदद से इनकार कर दिया है। सोनी सोढ़ी द्वारा चुनाव लडे़ जाने के संदर्भ में नक्‍सलियों ने कहा है कि बस्‍तर सीट से खडे़ होने वाली सोनी क्‍या बस्‍तर के संसाधनों को लूटने के लिए टाटा, एस्‍सार, जिंदल के साथ किए समझौते को रद्द कर पाएगी।

सर्चिंग के नाम पर प्रतिदिन गांवों पर हमला करते हुए जनता पर अत्‍याचार व सारकेगुड़ा, एड़समेटा जैसे नरसंहारों को रोक पाएगी। सोनी चुनाव में प्रत्‍याशी बनकर जनता से वोट मांगकर गरीबों के पेट पर लात मारने वाली सरकार को ही फायदा पहुंचाने का काम कर रही है। इससे आम जनता को फायद नहीं होगा।

नोटा की भी अनुमति नहीं

चुनाव में ‘इनमें से कोई नहीं’ अर्थात् नोटा ऑप्‍शन का भी नक्‍सली विरोध कर रहे हैं। साउथ रीजनल कमेटी सचिव के हवाले से कहा गया है कि नोटा बटन दबाने से जनता को कोई फायदा नहीं होने वाला। जल, जंगल, जमीन के लिए जन युद्ध का रास्‍ता ही विकल्‍प है। गत विस चुनाव में नक्‍सलियों द्वारा कई गांवों में नोटा के पक्ष में प्रचार किया गया था मगर इस बार वे नोटा को विरोध कर रहे हैं।

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